भारत और यूएई ने रणनीतिक तेल भंडारण सहयोग को बढ़ाया

भारत और यूएई ने रणनीतिक तेल भंडारण सहयोग को बढ़ाया

भारत और यूएई ने रणनीतिक तेल भंडारण सहयोग को बढ़ाया भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने 15 मई 2026 को ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण से जुड़ा महत्वपूर्ण समझौता किया। इस समझौते के तहत यूएई को भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व में 3 करोड़ बैरल तक कच्चा तेल संग्रहित करने की अनुमति दी जाएगी। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच अबू धाबी में हुई वार्ता के दौरान सामने आया। यह पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी को गहरा करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

क्या है भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व?

रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व यानी एसपीआर एक विशेष कच्चा तेल भंडारण प्रणाली है, जिसे आपूर्ति संकट या वैश्विक व्यवधान की स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए विकसित किया जाता है। भारत में इस व्यवस्था का संचालन इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड करता है, जो भारत सरकार की एक कंपनी है। वर्तमान में भारत के प्रमुख रणनीतिक तेल भंडारण केंद्र आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम तथा कर्नाटक के मंगलुरु और पादुर में स्थित हैं। इसके अलावा ओडिशा के चांदीखोल में भी नए विस्तार परियोजनाओं पर चर्चा चल रही है।

भारत-यूएई ऊर्जा सहयोग का विस्तार

इस नई व्यवस्था के तहत इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच रणनीतिक सहयोग समझौता किया गया है। समझौते में भारत में रणनीतिक गैस भंडार विकसित करने और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन तथा अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के बीच दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था को भी शामिल किया गया है। यह सहयोग केवल तेल भंडारण तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला, व्यापार और निवेश को भी मजबूत करने का प्रयास है।

फुजैरा और वैश्विक ऊर्जा महत्व

यूएई का फुजैरा क्षेत्र खाड़ी क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण तेल भंडारण और बंकरिंग केंद्रों में से एक माना जाता है। यह ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत और यूएई के बीच हुए ऊर्जा सहयोग ढांचे में फुजैरा में भारतीय कच्चे तेल भंडारण की संभावनाओं पर भी विचार किया गया है। इससे भारत को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति मार्गों तक अधिक रणनीतिक पहुंच मिल सकती है।

निवेश और आर्थिक सहयोग

ऊर्जा सहयोग के अलावा यूएई की विभिन्न संस्थाओं ने भारत में 5 अरब अमेरिकी डॉलर के नए निवेश की भी घोषणा की है। इससे बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ने की संभावना है। भारत और यूएई पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा और रक्षा सहयोग के क्षेत्रों में तेजी से रणनीतिक साझेदारी विकसित कर रहे हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व आपूर्ति संकट के समय ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
  • इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड भारत की रणनीतिक तेल भंडारण प्रणाली का संचालन करती है।
  • विशाखापट्टनम, मंगलुरु और पादुर भारत के प्रमुख रणनीतिक तेल भंडारण केंद्र हैं।
  • फुजैरा खाड़ी क्षेत्र का प्रमुख तेल भंडारण और बंकरिंग हब माना जाता है।

भारत और यूएई के बीच रणनीतिक तेल भंडारण सहयोग दोनों देशों की ऊर्जा साझेदारी को नई मजबूती प्रदान करेगा। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ने के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में उसकी रणनीतिक स्थिति भी मजबूत हो सकती है।

Originally written on May 16, 2026 and last modified on May 16, 2026.