उत्तर प्रदेश से भारतीय सेना को मिलेगा स्वदेशी गायों के दूध से बना स्कायर, डेयरी क्षेत्र को नई दिशा
उत्तर प्रदेश ने स्वदेशी गायों के दूध से तैयार किए गए उच्च प्रोटीन युक्त डेयरी उत्पादों की आपूर्ति भारतीय सेना को शुरू कर दी है। इस पहल के तहत स्कायर (Skyr) सहित कई विशेष डेयरी उत्पाद सेना तक पहुंचाए जा रहे हैं। यह कार्यक्रम गो-संरक्षण, ग्रामीण रोजगार, दुग्ध उत्पादन और आत्मनिर्भर डेयरी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। उत्पादों का निर्माण मुख्य रूप से गिर और साहीवाल जैसी स्वदेशी नस्लों के दूध से किया जा रहा है तथा इसमें डेनमार्क और आइसलैंड से जुड़ी आधुनिक डेयरी तकनीकों का उपयोग किया गया है।
क्या है स्कायर?
स्कायर एक उच्च प्रोटीन और कम वसा वाला डेयरी उत्पाद है, जिसे पारंपरिक रूप से आइसलैंड से जोड़ा जाता है। यह एक प्रकार का संवर्धित (Cultured) दुग्ध उत्पाद है, जो स्वाद, पोषण और स्वास्थ्य लाभों के कारण विश्वभर में लोकप्रिय हो रहा है। उत्तर प्रदेश में तैयार किए जा रहे इस उत्पाद को “स्कायरअप” (Skyrrup) नाम से बाजार में उतारा गया है। आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों के माध्यम से इसे भारतीय डेयरी उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया गया है।
स्वदेशी नस्लों का योगदान
इस पहल में गिर और साहीवाल जैसी प्रमुख भारतीय गाय नस्लों के दूध का उपयोग किया जा रहा है। गिर नस्ल का मूल संबंध गुजरात से है और यह अपनी उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादन क्षमता के लिए प्रसिद्ध है। वहीं साहीवाल नस्ल उच्च दूध उत्पादन, गर्म जलवायु में अनुकूलन क्षमता और बेहतर स्वास्थ्य के लिए जानी जाती है। इन नस्लों के संरक्षण और संवर्धन को डेयरी विकास के साथ जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
ऑपरेशन-4 की शुरुआत
उत्तर प्रदेश सरकार ने 18 मई 2026 को डेयरी क्षेत्र में ‘ऑपरेशन-4’ नामक कार्यक्रम शुरू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य स्वदेशी गायों पर आधारित डेयरी इकाइयों को बढ़ावा देना और दुग्ध उत्पादन को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। इस कार्यक्रम के तहत किसानों और उद्यमियों को डेयरी इकाइयों की स्थापना के लिए विभिन्न प्रकार की सहायता और सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
सरकारी योजनाओं का सहयोग
राज्य सरकार की मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना और नंदिनी कृषक समृद्धि योजना भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन योजनाओं के माध्यम से दो से लेकर 25 गायों तक की डेयरी इकाइयों को वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के डेयरी उद्यमियों को लाभ मिल रहा है।
रोजगार और ग्रामीण विकास
इस मॉडल को नोएडा के इंजीनियर एस.एन. द्विवेदी ने विकसित किया है। उनका उद्देश्य आधुनिक डेयरी तकनीक को ग्रामीण रोजगार और गो-संरक्षण के साथ जोड़ना है। बताया जाता है कि उनकी डेयरी इकाई में 250 से अधिक स्वदेशी गायों का पालन किया जा रहा है। यहां तैयार किए गए उत्पादों की मांग भारतीय सेना के साथ-साथ शहरी बाजारों में भी तेजी से बढ़ रही है। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है।
रक्षा आपूर्ति और बाजार विस्तार
यह कार्यक्रम डेयरी उत्पादन को सीधे रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने का उदाहरण प्रस्तुत करता है। भारतीय सेना को पौष्टिक और उच्च गुणवत्ता वाले दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराने के साथ-साथ यह स्वदेशी उत्पादन को भी प्रोत्साहित कर रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) तथा चेन्नई, बेंगलुरु और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों में भी ऑनलाइन माध्यम से इन उत्पादों की आपूर्ति की जा रही है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
यह पहल आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा के अनुरूप मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन, स्थानीय संसाधनों और स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देना है। स्वदेशी गायों के संरक्षण, आधुनिक डेयरी प्रसंस्करण और राष्ट्रीय बाजारों से जुड़ाव के माध्यम से यह मॉडल कृषि और डेयरी क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- स्कायर एक उच्च प्रोटीन और कम वसा वाला डेयरी उत्पाद है, जिसका पारंपरिक संबंध आइसलैंड से है।
- उत्तर प्रदेश में तैयार स्कायर उत्पाद को “स्कायरअप” नाम से बाजार में उतारा गया है।
- गिर और साहीवाल भारत की प्रमुख स्वदेशी दुग्ध उत्पादन करने वाली गाय नस्लें हैं।
- ऑपरेशन-4 की शुरुआत उत्तर प्रदेश सरकार ने 18 मई 2026 को की थी।
- मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना और नंदिनी कृषक समृद्धि योजना डेयरी इकाइयों को प्रोत्साहन प्रदान करती हैं।
- आत्मनिर्भर भारत का उद्देश्य घरेलू उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना है।
उत्तर प्रदेश की यह पहल स्वदेशी गायों के संरक्षण, आधुनिक डेयरी तकनीक, ग्रामीण रोजगार और राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं को एक साथ जोड़ने का अनूठा उदाहरण है। भारतीय सेना को उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने के साथ-साथ यह मॉडल किसानों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर डेयरी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।