जम्मू-कश्मीर कैबिनेट ने श्रीनगर में बिजली परियोजनाओं को दी मंजूरी
जम्मू-कश्मीर कैबिनेट ने 15 मई 2026 को श्रीनगर और आसपास के क्षेत्रों के लिए लगभग ₹93 करोड़ की बिजली अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी दी। इन परियोजनाओं के तहत जैनाकोट ग्रिड सब स्टेशन की क्षमता बढ़ाने और दो प्रमुख 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के उन्नयन का कार्य किया जाएगा। यह निर्णय केंद्र शासित प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने और वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।
जैनाकोट ग्रिड सब स्टेशन का विस्तार
श्रीनगर स्थित जैनाकोट ग्रिड सब स्टेशन बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। कैबिनेट के फैसले के अनुसार इसकी क्षमता 450 एमवीए से बढ़ाकर 780 एमवीए की जाएगी। इस परियोजना पर लगभग ₹67.66 करोड़ खर्च किए जाएंगे। एमवीए यानी मेगावोल्ट एम्पियर विद्युत प्रणाली में प्रयुक्त एक मानक इकाई है, जिसका उपयोग विद्युत क्षमता मापने के लिए किया जाता है। ग्रिड सब स्टेशन बिजली को विभिन्न वोल्टेज स्तरों पर परिवर्तित कर वितरण नेटवर्क तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। इस क्षमता विस्तार से श्रीनगर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।
132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों का उन्नयन
कैबिनेट ने 132 केवी पंपोर-रावलपोरा लाइन और 132 केवी रावलपोरा-बेमिना लाइन के उन्नयन को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत ₹25.47 करोड़ बताई गई है। 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनें उच्च वोल्टेज विद्युत नेटवर्क का हिस्सा होती हैं और इनका उपयोग बड़े पैमाने पर बिजली के संचार और ग्रिड कनेक्टिविटी के लिए किया जाता है। इन लाइनों के उन्नयन से बिजली आपूर्ति की स्थिरता बेहतर होगी और ट्रांसमिशन हानि कम करने में सहायता मिलेगी।
बिजली अवसंरचना और क्षेत्रीय विकास
ये मंजूरियां जम्मू-कश्मीर मंत्रिपरिषद की छठी बैठक में दी गईं। सरकार का उद्देश्य क्षेत्र में बिजली वितरण प्रणाली को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाना है। कश्मीर घाटी में तेजी से बढ़ती शहरी आबादी और ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए सब स्टेशन विस्तार और ट्रांसमिशन नेटवर्क सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। श्रीनगर घाटी का प्रमुख शहरी केंद्र है और यहां कई महत्वपूर्ण बिजली ट्रांसमिशन नोड मौजूद हैं।
जम्मू-कश्मीर का ऊर्जा ढांचा
31 अक्टूबर 2019 से जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के रूप में कार्य कर रहा है। इसके बाद से क्षेत्र में आधारभूत ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार मजबूत ग्रिड सब स्टेशन और उच्च क्षमता वाली ट्रांसमिशन लाइनें बिजली वितरण प्रणाली की रीढ़ मानी जाती हैं। इनके माध्यम से बड़े क्षेत्रों में स्थिर और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जम्मू-कश्मीर 31 अक्टूबर 2019 से केंद्र शासित प्रदेश है।
- ग्रिड सब स्टेशन बिजली को विभिन्न वोल्टेज स्तरों में परिवर्तित करने का कार्य करते हैं।
- 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनें क्षेत्रीय बिजली संचार और ग्रिड कनेक्टिविटी के लिए उपयोग की जाती हैं।
- एमवीए विद्युत प्रणाली में प्रयुक्त मानक क्षमता माप इकाई है।
श्रीनगर और आसपास के क्षेत्रों के लिए स्वीकृत ये बिजली परियोजनाएं जम्मू-कश्मीर की ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। इससे भविष्य में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में सुधार होने की संभावना है।