सुप्रीम कोर्ट ने प्राकृतिक गैस पर यूपी सरकार की वैट मांग को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने प्राकृतिक गैस पर यूपी सरकार की वैट मांग को खारिज किया

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 14 मई 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें आंध्र प्रदेश से कॉमन कैरियर पाइपलाइन के माध्यम से भेजी गई प्राकृतिक गैस पर वैट लगाने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि यह लेनदेन अंतरराज्यीय बिक्री की श्रेणी में आता है और इस पर केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 लागू होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी बिक्री पर राज्य सरकार वैट नहीं लगा सकती।

क्या है केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम की धारा 3(ए)?

केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 की धारा 3(ए) उन बिक्री लेनदेन से संबंधित है, जिनमें वस्तुओं की आवाजाही एक राज्य से दूसरे राज्य तक होती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आंध्र प्रदेश के तट के पास स्थित केजी-डी6 बेसिन से खरीदारों को दूसरे राज्यों में भेजी गई प्राकृतिक गैस इसी श्रेणी में आती है। इसलिए इसे अंतरराज्यीय बिक्री माना जाएगा और इस पर राज्य स्तरीय वैट लागू नहीं होगा। अदालत ने यह भी माना कि बिक्री की प्रक्रिया आंध्र प्रदेश में ही पूरी हो गई थी और बाद की गैस आवाजाही केवल डिलीवरी का हिस्सा थी।

कॉमन कैरियर पाइपलाइन की भूमिका

कॉमन कैरियर पाइपलाइन ऐसी पाइपलाइन प्रणाली होती है, जिसका उपयोग कई उपभोक्ताओं और कंपनियों द्वारा नियामक नियमों के तहत किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन पाइपलाइनों के माध्यम से गैस का दूसरे राज्यों तक पहुंचना उसकी अंतरराज्यीय प्रकृति को समाप्त नहीं करता। अदालत के अनुसार गैस की मीटरिंग, डिलीवरी और स्वामित्व हस्तांतरण आंध्र प्रदेश में ही हो चुका था, इसलिए बाद का परिवहन नया कर योग्य लेनदेन नहीं माना जा सकता।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2012 में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को भी सही ठहराया। हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी कर निर्धारण आदेशों को रद्द कर दिया था। ये आदेश रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, टाटा केमिकल्स और इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड जैसी कंपनियों के खिलाफ जारी किए गए थे। सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि पाइपलाइन के जरिए गैस की आगे की आवाजाही केवल आपूर्ति प्रक्रिया का हिस्सा थी और इसे अलग कर योग्य घटना नहीं माना जा सकता।

प्राकृतिक गैस और कर व्यवस्था

प्राकृतिक गैस भारत के अप्रत्यक्ष कर कानूनों के तहत कर योग्य खनिज ईंधन मानी जाती है। जब किसी राज्य में बिक्री पूरी हो जाती है और गैस दूसरे राज्य तक पहुंचाई जाती है, तो ऐसे मामलों में केंद्रीय बिक्री कर लागू हो सकता है। वित्त विधेयक 2016 में कॉमन कैरियर पाइपलाइन के माध्यम से भेजी गई मिश्रित गैस को लेकर एक स्पष्टीकरण भी जोड़ा गया था, जिसने ऐसे मामलों में कर व्यवस्था को स्पष्ट किया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 भारत में अंतरराज्यीय बिक्री पर लागू होता है।
  • धारा 3(ए) उन बिक्री लेनदेन से संबंधित है जिनसे वस्तुओं की अंतरराज्यीय आवाजाही होती है।
  • कॉमन कैरियर पाइपलाइन कई उपभोक्ताओं के लिए गैस परिवहन की साझा प्रणाली होती है।
  • इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस विवाद में अपना फैसला वर्ष 2012 में सुनाया था।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला प्राकृतिक गैस के अंतरराज्यीय व्यापार और कराधान से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टता प्रदान करता है। इससे ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों को कर व्यवस्था के संबंध में स्थिरता और निश्चितता मिलने की उम्मीद है।

Originally written on May 16, 2026 and last modified on May 16, 2026.

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