एससीओ के तहत भारत-चीन की पहली द्विपक्षीय वार्ता से संबंधों में आई नई नरमी

एससीओ के तहत भारत-चीन की पहली द्विपक्षीय वार्ता से संबंधों में आई नई नरमी

भारत और चीन ने 16–17 अप्रैल 2026 को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के तहत अपनी पहली द्विपक्षीय परामर्श बैठक आयोजित की। पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक चले सैन्य गतिरोध के 2024 में कम होने के बाद यह दोनों देशों के बीच संबंधों के सामान्यीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस बैठक ने यह संकेत दिया कि दोनों देश बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि रणनीतिक सतर्कता अभी भी बनी हुई है। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, दोनों पक्षों ने एससीओ नेताओं द्वारा लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन और संगठन की भविष्य दिशा पर विचार-विमर्श किया। साथ ही, एससीओ से जुड़े मामलों पर सहयोग और परामर्श को और गहरा करने पर सहमति बनी।

पूर्वी लद्दाख गतिरोध के बाद पहली औपचारिक वार्ता

यह बैठक इसलिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही क्योंकि पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सैन्य तनाव कम होने के बाद एससीओ के तहत यह पहली औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत थी। वर्ष 2020 में शुरू हुए सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के संबंध कई वर्षों तक तनावपूर्ण बने रहे। गलवान घाटी जैसी घटनाओं ने विश्वास को गंभीर रूप से प्रभावित किया था। हालांकि 2024 में स्थिति में कुछ सुधार आने के बाद अब दोनों देश फिर से कूटनीतिक संवाद बढ़ा रहे हैं। विशेष रूप से एससीओ और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर दोनों की सक्रिय भागीदारी इस नए संवाद का आधार बन रही है।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से मुलाकात कर एससीओ ढांचे के भीतर सहयोग की समीक्षा की। चर्चा के मुख्य विषयों में सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संपर्क शामिल रहे। भारत ने लगातार यह स्पष्ट किया है कि एससीओ को अपने मूल उद्देश्यों—आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई—पर केंद्रित रहना चाहिए। साथ ही, संतुलित क्षेत्रीय सहयोग और आर्थिक सहभागिता को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। भारत चाहता है कि यह मंच केवल रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि स्थिरता और विकास का माध्यम बने।

ब्रिक्स और उच्च स्तरीय यात्राओं का महत्व

चीन ने भारत की वर्तमान ब्रिक्स अध्यक्षता का भी समर्थन किया है, जिससे एससीओ के अलावा एक और महत्वपूर्ण मंच पर सहयोग बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले वर्ष एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए चीन गए थे, जिसे वर्षों के तनाव के बाद राजनीतिक संवाद की शुरुआत माना गया। अब चीन के विदेश मंत्री वांग यी के मई 2026 में भारत आने की संभावना है, जहां वे ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे। इसके अलावा, सितंबर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे की भी संभावना जताई जा रही है। ये यात्राएं दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में अहम मानी जा रही हैं।

कनेक्टिविटी और संप्रभुता पर भारत का स्पष्ट रुख

भारत एससीओ के तहत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं का समर्थन करता है, लेकिन केवल तब जब वे संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें। यह रुख विशेष रूप से उन परियोजनाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण है जो विवादित क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं। प्रधानमंत्री मोदी पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि ऐसी कनेक्टिविटी, जो किसी देश की संप्रभुता की अनदेखी करती है, अंततः विश्वास और उद्देश्य दोनों खो देती है। यही सिद्धांत भारत की चीन और व्यापक एससीओ ढांचे के साथ सहभागिता का मूल आधार बना हुआ है, जहां सहयोग और रणनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी और इसका मुख्य फोकस यूरेशिया क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग है।
  • भारत वर्ष 2017 में एससीओ का पूर्ण सदस्य बना था।
  • ब्रिक्स समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं, साथ ही हाल के वर्षों में इसका विस्तार भी हुआ है।
  • भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख गतिरोध वर्ष 2020 में शुरू हुआ था, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित किया।

भारत और चीन के बीच एससीओ के तहत हुई यह पहली द्विपक्षीय वार्ता संबंधों में नई नरमी का संकेत देती है। हालांकि दोनों देशों के बीच रणनीतिक अविश्वास पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, फिर भी बहुपक्षीय मंचों पर संवाद और सहयोग भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत हैं। यदि यह प्रक्रिया संतुलित और सम्मानजनक ढंग से आगे बढ़ती है, तो क्षेत्रीय स्थिरता और एशियाई कूटनीति को नई मजबूती मिल सकती है।

Originally written on April 19, 2026 and last modified on April 19, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *