ऑस्ट्रेलिया-जापान रक्षा समझौते से इंडो-पैसिफिक में बढ़ी रणनीतिक मजबूती
ऑस्ट्रेलिया और जापान ने 7 अरब डॉलर के एक बड़े रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत जापान रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी को उन्नत स्टेल्थ युद्धपोत उपलब्ध कराएगा। यह समझौता हाल के दशकों में जापान के सबसे बड़े सैन्य निर्यात सौदों में से एक माना जा रहा है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों, विशेष रूप से चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी के बीच यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करता है। यह कदम क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों की रक्षा और दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रक्षा समझौते की मुख्य बातें
इस समझौते के तहत जापान वर्ष 2029 से उन्नत मोगामी-क्लास फ्रिगेट्स के पहले तीन युद्धपोत ऑस्ट्रेलिया को सौंपेगा। इसके बाद आठ अतिरिक्त युद्धपोत ऑस्ट्रेलिया में ही निर्मित किए जाएंगे। यह परियोजना ऑस्ट्रेलिया की दीर्घकालिक नौसैनिक आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य समुद्री रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस अनुबंध पर टोक्यो में ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। दोनों नेताओं ने इस अवसर पर द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और गहरा करने पर जोर दिया।
मोगामी-क्लास फ्रिगेट्स की विशेषताएं
मोगामी-क्लास फ्रिगेट्स आधुनिक बहुउद्देशीय स्टेल्थ युद्धपोत हैं, जिन्हें पनडुब्बी रोधी युद्ध, वायु रक्षा और सतही हमले जैसे अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इनकी परिचालन क्षमता लगभग 10,000 नॉटिकल मील तक है, जिससे ये लंबी दूरी के मिशनों के लिए बेहद उपयोगी बनते हैं। इनमें 32-सेल वर्टिकल लॉन्च सिस्टम लगाया जाएगा, जो एंटी-शिप और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को लॉन्च करने में सक्षम होगा। ये युद्धपोत MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टर भी संचालित कर सकते हैं। प्रत्येक पोत पर लगभग 92 कर्मियों की तैनाती होगी। जापान की मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज ने जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स को पीछे छोड़ते हुए यह अनुबंध हासिल किया है।
ऑस्ट्रेलिया की नौसैनिक विस्तार रणनीति
ऑस्ट्रेलिया अगले दस वर्षों में अपने प्रमुख युद्धपोतों की संख्या 11 से बढ़ाकर 26 करने की योजना बना रहा है। यह उसकी व्यापक सैन्य निर्माण रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य लंबी दूरी की मारक क्षमता बढ़ाना और हिंद तथा प्रशांत महासागरों में व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा करना है। रक्षा उद्योग मंत्री पैट कॉनरॉय ने इसे ऑस्ट्रेलिया के इतिहास का सबसे तेज़ शांतिकालीन नौसैनिक अधिग्रहण बताया। भविष्य के युद्धपोत पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के हेंडरसन डिफेंस प्रीसिंक्ट में बनाए जाएंगे, जिससे लगभग 10,000 कुशल रोजगार सृजित होने की उम्मीद है और घरेलू जहाज निर्माण क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक महत्व
यह समझौता जापान की युद्धोत्तर शांतिवादी रक्षा नीति से धीरे-धीरे अधिक सक्रिय रणनीतिक भूमिका की ओर बढ़ने का संकेत देता है। साथ ही, यह ऑस्ट्रेलिया के उस प्रयास को भी दर्शाता है जिसमें वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव को संतुलित करना चाहता है। दोनों देश नौसैनिक प्रशिक्षण, परिचालन योजना और औद्योगिक सहयोग के माध्यम से समन्वय बढ़ा रहे हैं। क्वाड समूह के प्रमुख सदस्य होने के नाते ऑस्ट्रेलिया और जापान क्षेत्रीय साझेदारी को मजबूत कर समुद्री सुरक्षा, स्थिरता और सामूहिक रणनीतिक प्रतिक्रिया को बेहतर बनाना चाहते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- क्वाड समूह में भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका शामिल हैं, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग पर काम करते हैं।
- मोगामी-क्लास फ्रिगेट्स जापान के उन्नत बहुउद्देशीय स्टेल्थ युद्धपोत हैं, जो पनडुब्बी रोधी और वायु रक्षा अभियानों के लिए उपयोग किए जाते हैं।
- जापान की मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स देश की समुद्री सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है।
- पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का हेंडरसन डिफेंस प्रीसिंक्ट देश का एक प्रमुख नौसैनिक निर्माण और रक्षा केंद्र है।
ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच यह रक्षा समझौता केवल हथियारों की खरीद नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते रणनीतिक संतुलन का महत्वपूर्ण संकेत है। इससे दोनों देशों की रक्षा क्षमता बढ़ेगी, क्षेत्रीय स्थिरता मजबूत होगी और सामूहिक सुरक्षा ढांचे को नया बल मिलेगा। आने वाले समय में यह साझेदारी पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।