गंटूर के लैम फार्म ने विकसित की मिर्च की दो नई उन्नत किस्में

गंटूर के लैम फार्म ने विकसित की मिर्च की दो नई उन्नत किस्में

आंध्र प्रदेश के गंटूर स्थित क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान केंद्र (आरएचआरएस), लैम फार्म ने मिर्च उत्पादकों के लिए दो नई उन्नत किस्में—एलसीए-625 और एलसीए-643—जारी की हैं। 16 जून 2026 को लॉन्च की गई इन किस्मों को लोकप्रिय तेजा और ब्याडगी मिर्च के विकल्प के रूप में विकसित किया गया है। नई किस्मों का उद्देश्य किसानों को बेहतर उत्पादन, गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करना है, जिससे मिर्च की खेती अधिक लाभदायक बन सके।

एलसीए-625: सूखी मिर्च उत्पादन के लिए उपयुक्त

एलसीए-625 मुख्य रूप से सूखी मिर्च उत्पादन के लिए विकसित की गई है। इस किस्म की तीक्ष्णता 45,000 से 50,000 स्कोविल हीट यूनिट (एसएचयू) के बीच है, जो इसे काफी तीखी श्रेणी में रखती है। इसके अलावा, इसका लाल रंग मूल्य 60 से 65 एएसटीए यूनिट के बीच है, जो सूखी मिर्च और मिर्च पाउडर की गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। उच्च रंग और तीखापन इसे मसाला उद्योग के लिए आकर्षक विकल्प बनाते हैं।

एलसीए-643: हरी और सूखी दोनों मिर्च के लिए उपयोगी

एलसीए-643 को इस प्रकार विकसित किया गया है कि इसका उपयोग हरी तथा सूखी दोनों प्रकार की मिर्च के उत्पादन में किया जा सके। इसके फल प्रारंभ में हल्के हरे रंग के होते हैं और सूखने के बाद चमकीले लाल रंग में बदल जाते हैं। सूखी अवस्था में इसका स्वरूप प्रसिद्ध ब्याडगी मिर्च जैसा दिखाई देता है। इस किस्म में जेमिनी वायरस के प्रति मध्यम प्रतिरोध क्षमता पाई गई है और यह ब्लैक थ्रिप्स के प्रकोप की स्थिति में भी अच्छा प्रदर्शन करती है।

किसानों के लिए शुरू हुई बीज बिक्री

इन दोनों नई किस्मों के फाउंडेशन बीजों की बिक्री 16 जून 2026 से लैम फार्म में शुरू कर दी गई है। बीजों की कीमत 1,200 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित की गई है। सीमित उपलब्धता के कारण प्रत्येक किसान को अधिकतम 250 ग्राम बीज ही उपलब्ध कराया जा रहा है। फिलहाल ये बीज केवल लैम फार्म से ही प्राप्त किए जा सकते हैं।

मिर्च उत्पादन में नई संभावनाएं

भारत विश्व के प्रमुख मिर्च उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। आंध्र प्रदेश देश के सबसे बड़े मिर्च उत्पादक राज्यों में गिना जाता है। नई किस्मों के विकास से किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाली फसल प्राप्त करने में मदद मिलेगी, साथ ही रोग और कीटों से होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकेगा। इससे निर्यात क्षमता और मसाला उद्योग को भी लाभ मिलने की संभावना है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • स्कोविल हीट यूनिट (SHU) मिर्च की तीक्ष्णता और कैप्साइसिन की मात्रा को मापने की मानक इकाई है।
  • एएसटीए यूनिट का उपयोग सूखी मिर्च और मिर्च पाउडर के लाल रंग की गुणवत्ता मापने के लिए किया जाता है।
  • ब्याडगी मिर्च अपनी गहरी लाल रंगत के लिए प्रसिद्ध है और मसाला उद्योग में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।
  • ब्लैक थ्रिप्स और जेमिनी वायरस भारत में मिर्च की खेती को प्रभावित करने वाले प्रमुख कीट और रोगों में शामिल हैं।

गंटूर के लैम फार्म द्वारा विकसित एलसीए-625 और एलसीए-643 मिर्च की खेती में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही हैं। बेहतर रंग, तीखापन और रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली ये किस्में किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय मसाला उद्योग को भी नई मजबूती प्रदान कर सकती हैं। भविष्य में इन किस्मों का व्यापक उपयोग मिर्च उत्पादन की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता को और बेहतर बनाने में सहायक होगा।

Originally written on June 16, 2026 and last modified on June 16, 2026.

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