एमएसपी पर दालों और तिलहनों की खरीद को केंद्र की मंजूरी
केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय ने 18 और 19 जून 2026 को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत दालों और तिलहनों की बड़े पैमाने पर खरीद को मंजूरी दी है। यह खरीद मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के अंतर्गत की जाएगी और इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इस निर्णय के तहत तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में मूंग, उड़द तथा मूंगफली की खरीद की जाएगी। सरकार का उद्देश्य बाजार कीमतों में गिरावट की स्थिति में किसानों के हितों की रक्षा करना है।
मूल्य समर्थन योजना और एमएसपी का महत्व
मूल्य समर्थन योजना भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है, जिसके माध्यम से अधिसूचित कृषि जिंसों की खरीद तब की जाती है जब बाजार मूल्य एमएसपी से नीचे चला जाता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य वह निर्धारित मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से फसल खरीदने की गारंटी देती है। यह व्यवस्था किसानों को मूल्य जोखिम से बचाने और कृषि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एमएसपी की घोषणा प्रत्येक कृषि मौसम से पहले की जाती है ताकि किसानों को बुवाई से पहले संभावित आय का अनुमान मिल सके। इससे कृषि उत्पादन को प्रोत्साहन भी मिलता है और खाद्य सुरक्षा को मजबूत आधार प्राप्त होता है।
राज्यों को मिली खरीद मंजूरी
उत्तर प्रदेश को सबसे बड़ी खरीद मंजूरी प्राप्त हुई है। राज्य में ग्रीष्मकालीन 2026 सीजन के लिए 48,298 मीट्रिक टन मूंग, 97,970 मीट्रिक टन उड़द और 41,718 मीट्रिक टन मूंगफली की खरीद को स्वीकृति दी गई है। इस खरीद का कुल एमएसपी मूल्य 1,490 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। गुजरात में 18,250 मीट्रिक टन मूंग की खरीद को मंजूरी दी गई है, जिसका एमएसपी मूल्य 160 करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं हरियाणा में 2,115 मीट्रिक टन मूंग की खरीद की स्वीकृति दी गई है, जिसकी अनुमानित एमएसपी राशि 18 करोड़ रुपये से अधिक है। तमिलनाडु में रबी विपणन सत्र 2025-26 के लिए मूंग खरीद सीमा को 885 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 990 मीट्रिक टन कर दिया गया है। अतिरिक्त 105 मीट्रिक टन खरीद का एमएसपी मूल्य लगभग 8.68 करोड़ रुपये है।
खरीद की जाने वाली फसलें और कृषि मौसम
इस स्वीकृति में शामिल मूंग और उड़द दाल वर्ग की फसलें हैं, जबकि मूंगफली को तिलहन फसल माना जाता है। भारत की कृषि व्यवस्था में विभिन्न मौसमों के अनुसार खरीद और विपणन की अलग-अलग प्रक्रियाएं निर्धारित होती हैं। ग्रीष्मकालीन 2026 खरीद और रबी विपणन सत्र 2025-26 अलग-अलग कृषि एवं विपणन अवधियों से संबंधित हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी खरीद व्यवस्थाएं किसानों को बाजार में मूल्य अस्थिरता से बचाने के साथ-साथ उत्पादन को प्रोत्साहित करने में भी सहायक होती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत सरकार प्रमुख कृषि फसलों के लिए खरीफ और रबी दोनों मौसमों से पहले एमएसपी घोषित करती है।
- मूल्य समर्थन योजना मुख्य रूप से दालों, तिलहनों और खोपरा जैसी फसलों की खरीद के लिए लागू की जाती है।
- मूंग और उड़द दाल वर्ग की फसलें हैं, जबकि मूंगफली तिलहन श्रेणी में शामिल होती है।
- भारतीय कृषि में ग्रीष्मकालीन मौसम को कई संदर्भों में जायद मौसम भी कहा जाता है।
केंद्र सरकार की यह मंजूरी किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और तमिलनाडु में होने वाली यह खरीद न केवल किसानों की आय को समर्थन देगी बल्कि कृषि बाजार में स्थिरता बनाए रखने में भी योगदान देगी। एमएसपी और पीएसएस जैसी व्यवस्थाएं भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।