कॉलेज परिसरों में जैव विविधता का नया रिकॉर्ड तैयार करेगा भारत
भारत में उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए कैंपस बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (CBR) की राष्ट्रीय पहल शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों में मौजूद पौधों, पक्षियों, कीटों और अन्य जीवों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण करना है। 21-22 जुलाई 2026 को शुरू हुई यह पहल जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय स्तर पर प्रकृति-आधारित अध्ययन को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
कैंपस बायोडायवर्सिटी रजिस्टर क्या है
कैंपस बायोडायवर्सिटी रजिस्टर किसी शैक्षणिक परिसर में पाई जाने वाली वनस्पतियों, जीव-जंतुओं और अन्य जैविक प्रजातियों का रिकॉर्ड होता है। इस पहल के तहत हर भाग लेने वाले उच्च शिक्षण संस्थान के लिए एक अलग CBR तैयार किया जाएगा। यह अभ्यास एक वर्ष तक चलेगा और इसमें परिसर की जैव विविधता का वैज्ञानिक, व्यवस्थित और सार्वजनिक रूप से उपयोगी दस्तावेज तैयार किया जाएगा। इस पहल को नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण मिलकर लागू कर रहे हैं। नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन मैसूरु स्थित एक वन्यजीव अनुसंधान और संरक्षण संगठन है, जबकि राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण देश के जैव विविधता दस्तावेजीकरण ढांचे के तहत काम करता है।
नागरिक विज्ञान प्लेटफॉर्म से होगा डेटा संग्रह
इस दस्तावेजीकरण में प्रतिभागी iNaturalist, eBird और SeasonWatch जैसे नागरिक विज्ञान प्लेटफॉर्म का उपयोग करेंगे। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए प्रजातियों की पहचान, अवलोकन दर्ज करना और जैव विविधता से जुड़ी जानकारी साझा करना आसान होता है। इससे छात्रों, शिक्षकों और शोधार्थियों की भागीदारी भी बढ़ेगी। ऐसी पहलें केवल सूची बनाने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वे परिसर को एक जीवंत शहरी हरित क्षेत्र के रूप में समझने में मदद करती हैं। कॉलेज और विश्वविद्यालय अक्सर स्थानीय पक्षियों, पेड़ों और छोटे जीवों के लिए महत्वपूर्ण आवास बन जाते हैं, इसलिए उनका रिकॉर्ड संरक्षण योजनाओं के लिए उपयोगी होता है।
राज्यों के अनुभव और राष्ट्रीय महत्व
यह परियोजना लोगों की जैव विविधता रजिस्टर यानी PBR की अवधारणा पर आधारित है, जिसमें गांवों, कस्बों और शहरों की जैव विविधता दर्ज की जाती है। केरल में 16 जून 2026 को इसी तरह की कैंपस बायोडायवर्सिटी रजिस्टर पहल शुरू की गई थी। राज्य ने अपने सभी स्थानीय स्वशासी निकायों में PBR पूरा करने वाला पहला राज्य बनने का भी उल्लेखनीय काम किया है। राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की पहलें जैव विविधता संरक्षण को शैक्षणिक संस्थानों से जोड़ती हैं। इससे न केवल स्थानीय प्रजातियों का रिकॉर्ड बनता है, बल्कि पर्यावरण अध्ययन, शोध और नीति-निर्माण के लिए भी विश्वसनीय आधार तैयार होता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, जैविक विविधता अधिनियम 2002 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है।
- नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन का मुख्यालय मैसूरु, कर्नाटक में स्थित है।
- कैंपस बायोडायवर्सिटी रजिस्टर, लोगों की जैव विविधता रजिस्टर (PBR) की अवधारणा पर आधारित है।
- अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बेंगलुरु ने अपना Campus Biodiversity Register 2024-25 के लिए प्रकाशित किया था।
कॉलेज और विश्वविद्यालय इस पहल के लिए नवंबर 2026 तक पंजीकरण करा सकते हैं, जबकि दस्तावेजीकरण चरण जून 2027 में पूरा होने की योजना है। यह कदम शैक्षणिक परिसरों को जैव विविधता संरक्षण के सक्रिय केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।