किलाई बना तमिलनाडु का पहला जलवायु-लचीला गांव
तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले का किलाई गांव 22 जुलाई 2026 को राज्य का पहला पूरी तरह क्रियाशील जलवायु-लचीला गांव बन गया। यह पहल तमिलनाडु जलवायु परिवर्तन मिशन के तहत लागू की गई है, जिसमें पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, नवीकरणीय ऊर्जा और समुदाय-आधारित जलवायु कार्रवाई को एक साथ जोड़ा गया है।
जलवायु जोखिमों से निपटने की नई ग्रामीण मॉडल
तमिलनाडु सरकार ने 2022-23 में Climate Resilient Villages Programme शुरू किया था। यह कार्यक्रम तटीय बस्तियों पर मंडराने वाले जलवायु खतरों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इनमें चक्रवात, समुद्र-स्तर में वृद्धि, खारे पानी का प्रवेश, तटीय कटाव और जैव विविधता का नुकसान शामिल हैं। इसके साथ ही मछुआरा समुदायों की आजीविका को अधिक टिकाऊ बनाने पर भी जोर दिया गया है।यह कार्यक्रम राज्य के 11 जिलों में लागू है और इसमें 11 चिन्हित गांव शामिल हैं। किलाई पहला गांव है, जिसने इस ढांचे के सभी प्रमुख घटकों को जमीन पर उतारा है।
किलाई में क्या-क्या काम हुए
किलाई परियोजना पर 230.15 लाख रुपये खर्च किए गए। यह राशि जिला जलवायु परिवर्तन मिशन और कॉरपोरेट पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के माध्यम से उपलब्ध कराई गई। परियोजना का एक प्रमुख हिस्सा बकिंघम नहर के 3 किलोमीटर लंबे हिस्से का पुनरुद्धार था, जिसे 14 मार्च 2026 तक पूरा किया गया। इस काम में गाद निकालना और प्लास्टिक कचरे को हटाना शामिल था।इसके अलावा, गांव में आक्रामक प्रजाति Prosopis juliflora को हटाया गया और क्षेत्र में 3,000 से अधिक देशी मैंग्रोव पौधे लगाए गए। गांव की योजना में सार्वजनिक भवनों पर सोलर पैनल, स्ट्रीट लाइट, सोलर पार्क, सोलर ड्रायर और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
तटीय अनुकूलन के लिए क्यों अहम है यह पहल
मैंग्रोव तटीय क्षेत्रों में उगने वाले नमक-सहिष्णु पौधे हैं, जो ज्वारीय क्षेत्रों में मिट्टी को स्थिर रखने और तटरेखा को मजबूत करने में मदद करते हैं। इसलिए तटीय बहाली परियोजनाओं में इनका विशेष महत्व होता है। इसी तरह, Prosopis juliflora जैसी आक्रामक प्रजातियां स्थानीय पारिस्थितिकी पर दबाव डालती हैं, इसलिए उनका नियंत्रण जरूरी माना जाता है।किलाई का मॉडल केवल पर्यावरणीय सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ऊर्जा, आजीविका और सामुदायिक भागीदारी को भी जोड़ा गया है। यही वजह है कि इसे जलवायु अनुकूलन का एक समग्र ग्रामीण मॉडल माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- किलाई तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में स्थित है।
- Climate Resilient Villages Programme की शुरुआत 2022-23 में हुई थी।
- बकिंघम नहर तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से जुड़ी एक कृत्रिम नहर प्रणाली है।
- जिला जलवायु परिवर्तन मिशन, तमिलनाडु में जिला-स्तरीय जलवायु कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण तंत्र है।
किलाई का यह मॉडल दिखाता है कि जलवायु अनुकूलन अब केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि गांव स्तर पर लागू होने वाली व्यावहारिक रणनीति बनता जा रहा है। तटीय क्षेत्रों के लिए यह पहल भविष्य की चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।