भारत में वैज्ञानिक खदान बंदी को नई दिशा, AAROH रिपोर्ट जारी
कोयला मंत्रालय ने 23 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में AAROH यानी Annual Report on Mine Closure जारी की। यह भारत में वैज्ञानिक खदान बंदी और बंद खदानों के पुन: उपयोग पर तैयार की गई पहली व्यापक रिपोर्ट मानी जा रही है। इसमें देशभर की 42 वैज्ञानिक रूप से बंद की गई कोयला खदानों का दस्तावेजीकरण किया गया है और यह दिखाया गया है कि खनन के बाद भूमि को सुरक्षित, उपयोगी और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से कैसे पुनर्जीवित किया जा सकता है।
वैज्ञानिक खदान बंदी क्यों अहम है
वैज्ञानिक खदान बंदी का अर्थ केवल खदान को बंद करना नहीं, बल्कि उसे एक नियोजित प्रक्रिया के तहत सुरक्षित तरीके से समेटना है। इसमें भूमि को स्थिर करना, पर्यावरणीय बहाली करना, ढलानों को मजबूत बनाना, पानी के प्रबंधन की व्यवस्था करना, पौधरोपण करना और लंबे समय तक निगरानी रखना शामिल होता है। भारत जैसे देश में, जहां कोयला खनन कई क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था और आजीविका से जुड़ा है, वहां यह प्रक्रिया पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट में किन व्यवस्थाओं पर जोर
यह रिपोर्ट कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन ने तैयार की है, जिसने कोयला मंत्रालय के तहत खदान बंदी तंत्र को मजबूत करने में भूमिका निभाई है। रिपोर्ट में RECLAIM, SUVIKALP डिजिटल प्लेटफॉर्म, ARTHA फ्रेमवर्क और Mine Closure Guidelines 2025 जैसे प्रमुख उपकरणों और दिशानिर्देशों का उल्लेख है। इन पहलों का उद्देश्य खदान बंदी को अधिक पारदर्शी, तकनीकी और मानकीकृत बनाना है, ताकि बंद खदानों की भूमि को सुरक्षित रूप से नए उपयोग में लाया जा सके।
बंद खदानों का नया उपयोग और वित्तीय प्रावधान
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने वैज्ञानिक खदान बंदी के लिए 40,000 करोड़ रुपये का समर्पित कोष घोषित किया है। स्वीकृत खदान बंदी लागत का 25 प्रतिशत, यानी लगभग 10,000 करोड़ रुपये, अगले दस वर्षों में समुदाय विकास के लिए रखा गया है। यह संकेत देता है कि खदान बंदी को केवल तकनीकी काम नहीं, बल्कि स्थानीय समाज के पुनर्वास और नए अवसरों से जोड़कर देखा जा रहा है।रिपोर्ट के अनुसार, पुनः प्राप्त खदान भूमि का उपयोग नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, इको-टूरिज्म, जल संरक्षण, कृषि और Coal Neer संयंत्रों के लिए किया जा रहा है। Coal Neer संयंत्र खदान के पानी को शुद्ध कर बोतलबंद पेयजल के रूप में उपयोग करते हैं। इससे खनन-प्रभावित क्षेत्रों में संसाधनों के बेहतर उपयोग की संभावना बनती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत में वैज्ञानिक रूप से बंद की गई कोयला खदानों की संख्या 42 है।
- इनमें से 33 खदानें पिछले एक वर्ष में बंद की गईं।
- अगले दो से तीन वर्षों में 147 और खदानों को वैज्ञानिक रूप से बंद करने का लक्ष्य है।
- RECLAIM, SUVIKALP और ARTHA भारत के mine closure framework से जुड़े प्रमुख शब्द हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग से तकनीकी मजबूती
23 जुलाई 2026 को कोयला मंत्रालय और Deutsche Gesellschaft für Internationale Zusammenarbeit के बीच एक कार्यान्वयन समझौता भी हुआ। इसका उद्देश्य खदान बंदी के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का उपयोग करना है। इससे भारत को खदान पुनर्स्थापन, पर्यावरणीय प्रबंधन और भूमि पुन: उपयोग की आधुनिक पद्धतियों को अपनाने में मदद मिल सकती है।कुल मिलाकर AAROH रिपोर्ट यह दिखाती है कि भारत अब खदान बंदी को एक पर्यावरणीय और विकासात्मक नीति के रूप में देख रहा है। बंद खदानों को सुरक्षित, उत्पादक और समुदाय-हितैषी भूमि में बदलने की यह दिशा भविष्य की खनन नीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत देती है।