भारत में ASML की एंट्री से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को नई गति
डच कंपनी ASML ने सितंबर 2026 में भारत में औपचारिक रूप से परिचालन शुरू कर दिया है और देश में अपनी कानूनी इकाई भी स्थापित कर ली है। सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होने वाली लिथोग्राफी प्रणालियों के लिए जानी जाने वाली यह कंपनी अब भारत में ग्राहक सहायता कार्यालय भी बना रही है। शुरुआती चरण में कंपनी 20 से 30 युवा इंजीनियरिंग स्नातकों की भर्ती करने की योजना पर काम कर रही है।
सेमीकंडक्टर निर्माण में ASML की भूमिका
ASML का नाम वैश्विक चिप उद्योग में बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि इसकी लिथोग्राफी मशीनें सिलिकॉन वेफर पर सर्किट पैटर्न स्थानांतरित करने के काम आती हैं। यही प्रक्रिया चिप निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक होती है। कंपनी उन्नत लिथोग्राफी टूल्स और उनसे जुड़ी सेवाएं सेमीकंडक्टर फैब्स को उपलब्ध कराती है।
भारत जैसे देश में, जहां चिप निर्माण को लेकर बड़े निवेश और नीति समर्थन की दिशा में काम हो रहा है, ASML की मौजूदगी तकनीकी क्षमता, सप्लाई चेन और औद्योगिक सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
गुजरात के धोलेरा प्रोजेक्ट से जुड़ाव
ASML ने मई 2026 में Tata Electronics के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की थी। यह साझेदारी गुजरात के धोलेरा में Tata Electronics की 300 mm सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन सुविधा की स्थापना और उसके विस्तार से जुड़ी है। इस परियोजना में लगभग 11 अरब डॉलर का निवेश प्रस्तावित है और इसका लक्ष्य प्रति माह 50,000 वेफर उत्पादन का है।
यह फैब 2028 में संचालन शुरू करने की योजना पर है और ऑटोमोबाइल, मोबाइल डिवाइस तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करेगा। 300 mm वेफर आधुनिक सेमीकंडक्टर निर्माण में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं, इसलिए यह परियोजना भारत की चिप निर्माण क्षमता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है।
भारत की सेमीकंडक्टर नीति और आगे की चुनौती
भारत ने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने के लिए Semicon 2.0 योजना की घोषणा की है, जिसके तहत लगभग 1.27 लाख करोड़ रुपये यानी 13.5 अरब डॉलर का प्रोत्साहन प्रावधान रखा गया है। इस नीति ढांचे में फैब्रिकेशन यूनिट्स, सप्लाई-चेन विकास और संबंधित सेमीकंडक्टर अवसंरचना को समर्थन शामिल है।
उम्मीद है कि इस योजना के तहत 12 अरब डॉलर मूल्य के निवेश प्रस्ताव सामने आ सकते हैं। ASML के वरिष्ठ अधिकारी Allan Wayne के अनुसार, भारत 2032 तक अपनी स्थानीय सेमीकंडक्टर मांग का 15 से 25 प्रतिशत हिस्सा पूरा करने का लक्ष्य रखता है। यह लक्ष्य तभी संभव होगा जब देश में कई फैब्रिकेशन प्लांट, तकनीकी साझेदारियां और सहायक औद्योगिक ढांचा समानांतर रूप से विकसित हों।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ASML एक डच कंपनी है और सेमीकंडक्टर लिथोग्राफी सिस्टम की प्रमुख आपूर्तिकर्ता मानी जाती है।
- लिथोग्राफी प्रक्रिया चिप निर्माण में सिलिकॉन वेफर पर सर्किट पैटर्न डालने के लिए उपयोग होती है।
- 300 mm वेफर आधुनिक सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स में व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं।
- धोलेरा गुजरात का एक नियोजित औद्योगिक शहर है, जहां सेमीकंडक्टर परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं।
ASML की भारत में शुरुआत केवल एक कंपनी विस्तार नहीं, बल्कि देश के सेमीकंडक्टर मिशन में वैश्विक तकनीकी साझेदारी का संकेत भी है। आने वाले वर्षों में यह कदम भारत की चिप निर्माण क्षमता और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को नई दिशा दे सकता है।