डीआरडीओ की 30 किलोवाट लेजर हथियार तकनीक से ड्रोन-रोधी क्षमता मजबूत

डीआरडीओ की 30 किलोवाट लेजर हथियार तकनीक से ड्रोन-रोधी क्षमता मजबूत

डीआरडीओ 30 किलोवाट श्रेणी के एक निर्देशित-ऊर्जा हथियार (Directed-Energy Weapon) पर काम कर रहा है, जिसे इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम (IDD&IS) Mk-IIA के तहत विकसित किया जा रहा है। यह प्रणाली ड्रोन स्वार्म, फिक्स्ड-विंग मानवरहित विमानों और निगरानी सेंसरों को निष्क्रिय करने के लिए बनाई गई है।

लेजर आधारित यह प्रणाली कैसे काम करती है

निर्देशित-ऊर्जा हथियारों में लक्ष्य पर केंद्रित ऊर्जा, आमतौर पर लेजर या माइक्रोवेव, छोड़ी जाती है ताकि उसे नुकसान पहुंचाया जा सके या निष्क्रिय किया जा सके। इस 30 किलोवाट लेजर हथियार की क्षमता लगभग 5 किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेदने की बताई गई है। यह संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकता है और इलेक्ट्रॉनिक सेंसरों को भी निष्क्रिय कर सकता है।

परीक्षणों में क्या दिखा

इस प्रणाली के अंतिम परीक्षण अगस्त 2025 में पूरे हुए। इससे पहले 13 अप्रैल 2025 को आंध्र प्रदेश के कुरनूल स्थित नेशनल ओपन एयर रेंज (NOAR) में ट्रक-माउंटेड Mk-II(A) लेजर-DEW सिस्टम का प्रदर्शन किया गया था। परीक्षण के दौरान इसने लंबी दूरी पर फिक्स्ड-विंग ड्रोन को निशाना बनाया, कई ड्रोन के एक साथ हमले को रोका और निगरानी सेंसर तथा एंटीना को नष्ट किया।

यह प्रदर्शन इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आधुनिक युद्ध और सुरक्षा चुनौतियों में ड्रोन का उपयोग तेजी से बढ़ा है। ऐसे में कम लागत में तेजी से प्रतिक्रिया देने वाली लेजर-आधारित प्रणाली पारंपरिक हथियारों के पूरक के रूप में उभर रही है।

उद्योग को तकनीक हस्तांतरण और आगे की योजना

डीआरडीओ ने 30 किलोवाट संस्करण के लिए भारतीय उद्योग साझेदारों को तकनीक हस्तांतरण (ToT) की मंजूरी दे दी है, ताकि इसका स्वदेशी उत्पादन और तैनाती हो सके। सितंबर 2026 से छह महीनों के भीतर इस प्रणाली के लिए उद्योग उत्पादन साझेदार चुनने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

यह कदम भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूत करने की दिशा में अहम है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि देश में उच्च-शक्ति लेजर हथियारों के निर्माण का औद्योगिक आधार भी तैयार होगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • निर्देशित-ऊर्जा हथियार लक्ष्य को नष्ट करने के लिए लेजर या माइक्रोवेव जैसी केंद्रित ऊर्जा का उपयोग करते हैं।
  • ड्रोन स्वार्म कई मानवरहित विमानों का समन्वित समूह होता है, जो एक साथ हमला या निगरानी कर सकता है।
  • नेशनल ओपन एयर रेंज (NOAR) आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित एक परीक्षण केंद्र है।
  • उच्च-शक्ति लेजर हथियार क्षमता के मामले में भारत सीमित देशों के समूह में शामिल हो रहा है।

30 किलोवाट DEW भारत की काउंटर-ड्रोन और वायु-रक्षा तकनीक में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसके साथ डीआरडीओ 50-100 किलोवाट और 300 किलोवाट श्रेणी की अगली पीढ़ी की लेजर प्रणालियों पर भी काम कर रहा है।

Originally written on September 21, 2026 and last modified on September 21, 2026.

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