गंगा पर इलेक्ट्रिक नावों से हरित जल परिवहन की शुरुआत

गंगा पर इलेक्ट्रिक नावों से हरित जल परिवहन की शुरुआत

वाराणसी में गंगा नदी पर पारंपरिक यात्री नावों को इलेक्ट्रिक नावों में बदलने की पायलट परियोजना शुरू की गई है। 23 जुलाई 2026 को नमो घाट पर इस योजना के पहले चरण का शुभारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य घाटों के बीच चलने वाली नाव सेवाओं को अधिक स्वच्छ, आधुनिक और कम प्रदूषणकारी बनाना है।

वाराणसी में शुरू हुआ पहला चरण

इस परियोजना का उद्घाटन वाराणसी के मेयर अशोक कुमार तिवारी ने किया। इसे वाराणसी विकास प्राधिकरण और GAIL (इंडिया) लिमिटेड मिलकर लागू कर रहे हैं। शुरुआती चरण में 20 पारंपरिक यात्री नावों को इलेक्ट्रिक प्रणाली में बदला जा रहा है। इनमें से पहली पांच नावों को संचालन के लिए तैयार किया गया है।यह पहल गंगा किनारे नाव परिवहन को ऊर्जा-कुशल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। वाराणसी जैसे धार्मिक और पर्यटन-प्रधान शहर में नावों का उपयोग बड़ी संख्या में यात्रियों और श्रद्धालुओं द्वारा किया जाता है, इसलिए इस तरह की तकनीक से स्थानीय परिवहन व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।

तकनीकी बदलाव और संचालन क्षमता

परिवर्तित की गई पहली पांच नावों में 15 किलोवाट का इलेक्ट्रिक आउटबोर्ड मोटर और 20 किलोवाट-घंटे की लिथियम बैटरी पैक लगाई गई है। प्रत्येक नाव में ईवी चार्जर, डिजिटल डिस्प्ले, जीपीएस ट्रैकिंग और रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी सुविधाएँ दी गई हैं।इन नावों की खासियत यह है कि एक बार चार्ज होने पर ये अस्सी घाट और नमो घाट के बीच कम से कम तीन राउंड ट्रिप पूरी कर सकती हैं। घाटों पर चार्जिंग ढांचा भी स्थापित किया गया है, ताकि नाव संचालन में रुकावट न आए। आधुनिक निगरानी व्यवस्था से नावों की स्थिति, संचालन और सुरक्षा पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा।

स्वच्छ जल परिवहन की दिशा में संकेत

इलेक्ट्रिक नावें कम उत्सर्जन वाले जल परिवहन का हिस्सा मानी जाती हैं। ऐसे वाहनों से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटती है और नदी क्षेत्र में प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है। गंगा जैसे संवेदनशील जल-परिस्थितिकी तंत्र में यह बदलाव पर्यावरणीय दृष्टि से अहम है।इस परियोजना के तहत नाविकों को भी सम्मानित किया गया। दीपक साहनी, राकेश साहनी, ज्योतिलाल निषाद, दीपक कुमार साहनी और शुभम साहनी को अपनी नावों को इलेक्ट्रिक प्रणाली में बदलने के लिए सम्मान मिला। इससे स्थानीय नाविक समुदाय की भागीदारी भी स्पष्ट होती है, जो किसी भी तकनीकी बदलाव को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • वाराणसी उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के किनारे स्थित एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन शहर है।
  • GAIL (इंडिया) लिमिटेड पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन एक महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है।
  • इलेक्ट्रिक नावें स्वच्छ परिवहन और कम-उत्सर्जन जल परिवहन प्रणालियों में गिनी जाती हैं।
  • जीपीएस ट्रैकिंग और रिमोट मॉनिटरिंग आधुनिक समुद्री और जल परिवहन तकनीक की सामान्य विशेषताएँ हैं।

वाराणसी की यह पहल भारत में हरित जल परिवहन के विस्तार की दिशा में एक व्यावहारिक प्रयोग है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे अन्य नदी-आधारित शहरों में भी अपनाया जा सकता है।

Originally written on July 25, 2026 and last modified on July 25, 2026.

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