थार में गोडावण संरक्षण को नई उम्मीद, चूजों की रिवाइल्डिंग शुरू
राजस्थान के जैसलमेर जिले के रामदेवरा स्थित गोडावण संरक्षण केंद्र में 26 जुलाई 2026 को ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के तीन चूजों को विशेष रूप से तैयार रिवाइल्डिंग टनल में छोड़ा गया। एक महीने के ये चूजे R9, R10 और R11 के रूप में पहचाने गए हैं, जिनमें दो नर और एक मादा शामिल है। यह कदम कैप्टिव ब्रीडिंग से आगे बढ़कर इन दुर्लभ पक्षियों को प्राकृतिक वातावरण में लौटाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
कैप्टिव ब्रीडिंग से जंगल की ओर बढ़ता कदम
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भारत के शुष्क और अर्ध-शुष्क घासभूमि क्षेत्रों से जुड़ा एक अत्यंत संकटग्रस्त पक्षी है। यह दुनिया के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में गिना जाता है और थार मरुस्थल की पारिस्थितिकी से गहराई से जुड़ा हुआ है। लंबे समय से इसके संरक्षण के लिए कैप्टिव ब्रीडिंग, आवास संरक्षण और नियंत्रित रिलीज जैसी रणनीतियाँ अपनाई जा रही हैं। रिवाइल्डिंग टनल का उपयोग इस प्रक्रिया में एक नया चरण है, जिसका उद्देश्य पक्षियों को मनुष्यों पर निर्भर होने से बचाना है।
रामदेवरा की रिवाइल्डिंग सुविधा कैसे काम करेगी
रामदेवरा में बनी यह सुविधा लगभग 9.25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई है। इसका ढांचा इस तरह बनाया गया है कि चूजों का मानव संपर्क न्यूनतम रहे और वे प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप व्यवहार विकसित कर सकें। इन चूजों पर करीब चार महीने तक सीसीटीवी से लगातार निगरानी रखी जाएगी। भोजन बाहर से उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन सीधे मानव हस्तक्षेप के बिना। इससे उनके भीतर चारा खोजने की प्रवृत्ति, मरुस्थलीय अनुकूलन और जीवित रहने की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।
डेजर्ट नेशनल पार्क में संभावित पुनर्वास
रिवाइल्डिंग चरण पूरा होने के बाद इन चूजों को राजस्थान के डेजर्ट नेशनल पार्क में छोड़े जाने की योजना है। यह पार्क ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवासों में से एक माना जाता है। जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में फैला यह क्षेत्र न केवल इस पक्षी, बल्कि अन्य मरुस्थलीय जीवों के लिए भी अहम है। थार क्षेत्र में संरक्षण प्रयासों के तहत घासभूमि की सुरक्षा, आवास विखंडन पर नियंत्रण और जमीन पर घोंसला बनाने वाले पक्षियों के लिए खतरे कम करना प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को IUCN रेड लिस्ट में Critically Endangered श्रेणी में रखा गया है।
- भारत में इस पक्षी का सबसे बड़ा प्राकृतिक ठिकाना राजस्थान माना जाता है।
- यह प्रजाति वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित है।
- डेजर्ट नेशनल पार्क राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में स्थित है।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण में यह रिवाइल्डिंग प्रयोग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल प्रजनन तक सीमित नहीं है, बल्कि पक्षियों को वास्तविक जंगल के लिए तैयार करने की दिशा में एक व्यावहारिक प्रयास है।