पद्मश्री कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. जी. विजयाराघवन का निधन, चिकित्सा जगत को बड़ी क्षति
पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जी. विजयाराघवन का 20 सितंबर 2026 को केरल के तिरुवनंतपुरम में 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे KIMS Healthcare के संस्थापक और उपाध्यक्ष थे तथा भारतीय चिकित्सा विज्ञान में उनके योगदान के लिए उन्हें 2009 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
चिकित्सा शिक्षा से लेकर विशेषज्ञता तक का सफर
डॉ. विजयाराघवन का जन्म 18 सितंबर 1942 को कोल्लम जिले के पेरुम्पुझा में हुआ था। उन्होंने 1964 में तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने कार्डियोलॉजी को अपना कार्यक्षेत्र बनाया और लंबे समय तक हृदय रोगों के उपचार, शोध और प्रशिक्षण से जुड़े रहे।
उनका करियर केवल एक चिकित्सक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वे संस्थागत नेतृत्व और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे। उन्होंने केरल में सतत चिकित्सा शिक्षा और शोध से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्डियोलॉजी में ऐतिहासिक योगदान
डॉ. विजयाराघवन को भारत में इकोकार्डियोग्राफी के शुरुआती और महत्वपूर्ण विशेषज्ञों में गिना जाता है। वर्ष 1980 में उन्होंने तिरुवनंतपुरम के सरकारी मेडिकल कॉलेज में देश की पहली दो-आयामी इकोकार्डियोग्राफी प्रयोगशाला स्थापित की थी। यह उपलब्धि हृदय रोगों की जांच और निदान के क्षेत्र में एक बड़ा कदम मानी जाती है।
उन्होंने उष्णकटिबंधीय एंडोमायोकार्डियल फाइब्रोसिस पर भी शोध किया, जो दक्षिण भारत सहित कुछ उष्ण क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक जटिल हृदय रोग है। उनके कार्य ने न केवल इलाज की समझ को बेहतर बनाया, बल्कि क्षेत्रीय रोगों पर वैज्ञानिक अध्ययन को भी मजबूती दी।
सम्मान, संस्थागत भूमिका और अंतिम संस्कार
KIMS Healthcare में वे दो दशकों से अधिक समय तक कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख रहे। इसके साथ ही वे संस्था के उपाध्यक्ष भी रहे। चिकित्सा क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई संस्थानों से लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी मिले।
उनके निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को KIMS HEALTH के ओस्लर हॉल में सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा गया। 22 सितंबर 2026 को शांतिकावडम में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किए जाने की योजना थी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पद्मश्री भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक है और इसकी घोषणा भारत सरकार करती है।
- दो-आयामी इकोकार्डियोग्राफी हृदय की संरचना और कार्यक्षमता की जांच के लिए उपयोग की जाने वाली अल्ट्रासाउंड आधारित तकनीक है।
- तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज केरल के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल है।
- उष्णकटिबंधीय एंडोमायोकार्डियल फाइब्रोसिस एक प्रकार की प्रतिबंधात्मक कार्डियोमायोपैथी है, जो उष्ण क्षेत्रों में देखी जाती है।
डॉ. जी. विजयाराघवन का जीवन भारतीय कार्डियोलॉजी में शोध, नवाचार और संस्थागत नेतृत्व का उदाहरण रहा। उनके निधन से चिकित्सा जगत ने एक अनुभवी और दूरदर्शी विशेषज्ञ को खो दिया है।