आईबीबीआई की कमान फिलहाल जयन्ती प्रसाद के हाथों में
भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) में जयन्ती प्रसाद ने 13 सितंबर 2026 से अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया है। वे 20 नवंबर 2026 तक या पूर्णकालिक उत्तराधिकारी के कार्यभार ग्रहण करने तक इस पद पर रहेंगे।
कौन हैं जयन्ती प्रसाद
जयन्ती प्रसाद आईबीबीआई के पूर्णकालिक सदस्य हैं और भारतीय लेखा एवं लेखा सेवा (आईएएंडएएस) के 1986 बैच से आते हैं। उन्होंने 5 जुलाई 2022 को आईबीबीआई में पूर्णकालिक सदस्य के रूप में कार्यभार संभाला था। अब उन्हें बोर्ड के शीर्ष पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है, जिससे नियामक संस्था का कामकाज बिना रुकावट जारी रह सके।
आईबीबीआई की भूमिका क्यों अहम है
आईबीबीआई एक वैधानिक नियामक संस्था है, जिसकी स्थापना दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के तहत की गई थी। यह भारत में दिवाला प्रक्रिया से जुड़े पेशेवरों, दिवाला पेशेवर एजेंसियों, सूचना उपयोगिताओं और कॉरपोरेट दिवाला प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है। आर्थिक तनाव या ऋण संकट की स्थिति में यह संस्था समाधान प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अध्यक्ष पद में बदलाव और आगे की प्रक्रिया
आईबीबीआई के पूर्व अध्यक्ष रवि मित्तल ने 65 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद अपना कार्यकाल समाप्त किया। वे फरवरी 2022 में पांच वर्ष के कार्यकाल या 65 वर्ष की आयु, जो पहले हो, तक के लिए नियुक्त किए गए थे। अब केंद्र सरकार ने स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नए अध्यक्ष के पदभार संभालते ही जयन्ती प्रसाद का अतिरिक्त प्रभार समाप्त हो जाएगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आईबीबीआई की स्थापना दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के तहत हुई थी।
- यह संस्था वैधानिक नियामक के रूप में काम करती है।
- आईबीबीआई दिवाला पेशेवरों, दिवाला पेशेवर एजेंसियों और सूचना उपयोगिताओं को नियंत्रित करता है।
- जयन्ती प्रसाद आईएएंडएएस 1986 बैच के अधिकारी हैं।
इस बदलाव के साथ आईबीबीआई में नेतृत्व की निरंतरता बनी रहेगी, जबकि सरकार स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।