मदुरै में 107 साल पुराने बरगद की विरासत बचाने का संदेश
तमिलनाडु के मदुरै में 27 जुलाई 2026 को मीणाक्षीपुरम क्षेत्र के 107 साल पुराने बरगद के पेड़ का जन्मदिन मनाया गया। सेलूर-कुलंगलम रोड के पास, सेलूर टैंक के निकट खड़ा यह पेड़ अपने इलाके में बचा हुआ एक दुर्लभ, पुराना वृक्ष माना जा रहा है। इस आयोजन ने केवल एक पेड़ की उम्र का उत्सव नहीं मनाया, बल्कि शहरी हरियाली, पक्षियों के आवास और पुराने वृक्षों की सुरक्षा पर भी ध्यान खींचा।
शहरी जैव विविधता में बरगद की भूमिका
बरगद का वैज्ञानिक नाम Ficus benghalensis है और यह Moraceae परिवार की एक बड़ी अंजीर प्रजाति है। इसकी पहचान इसकी फैली हुई छतरी, हवाई जड़ों और लंबे जीवनकाल से होती है। भारत में बरगद को छाया देने वाले, पर्यावरण को सहारा देने वाले और शहरी हरियाली बढ़ाने वाले वृक्ष के रूप में देखा जाता है। मदुरै का यह पेड़ पक्षियों के घोंसले का स्थान भी रहा है, इसलिए इसे केवल एक पुराना पेड़ नहीं, बल्कि स्थानीय जैव विविधता का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
संरक्षण अभियान और स्थानीय पहल
इस पेड़ का जन्मदिन ग्रीन नेचर फेस्टिवल के रूप में जल निकाय संरक्षण आंदोलन और अन्य जनकल्याण ट्रस्टों ने आयोजित किया। आंदोलन के संस्थापक अबूबकर ने समारोह का नेतृत्व किया। जानकारी के अनुसार, 2019 से हर वर्ष इस पेड़ का जन्मदिन मनाया जा रहा है। 2024 में भी इसे 105 वर्ष पुराना बताया गया था और तब मीणाम्बलपुरम के अबू बकर द्वारा जल प्रबंधन व्यवस्था के साथ इसकी देखभाल किए जाने की बात सामने आई थी। 27 जुलाई 2026 के कार्यक्रम में पेड़ को रोशनी से सजाया गया और उपस्थित विद्यार्थियों को नोटबुक तथा पौधे वितरित किए गए।
पुराने पेड़ों पर मंडराते खतरे
संरक्षणकर्ताओं के अनुसार, इस बरगद को कई तरह के खतरे झेलने पड़े हैं। इनमें कचरा जलाना, बिजली विभाग के कर्मचारियों द्वारा बार-बार शाखाएँ काटना और त्योहारों में पटाखों के शोर से होने वाला दबाव शामिल है। स्थानीय स्तर पर सड़क चौड़ीकरण और पार्क निर्माण के लिए पहले ही कम से कम सात अन्य बरगदों को हटाया जा चुका है। यही कारण है कि इस पेड़ की सुरक्षा को पुराने सड़क किनारे वृक्षों के संरक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बरगद का वैज्ञानिक नाम Ficus benghalensis है।
- यह Moraceae परिवार का वृक्ष है, जिसमें अंजीर जैसी प्रजातियाँ शामिल हैं।
- बरगद की हवाई जड़ें और विशाल छतरी इसे लंबे समय तक जीवित रहने और व्यापक छाया देने में सक्षम बनाती हैं।
- मदुरै तमिलनाडु का एक प्रमुख शहर है, जो अपने सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व के लिए जाना जाता है।
इसी दिन करूर जिले के कुलिथलाई क्षेत्र में 200 साल पुराना एक बरगद गिर गया, जिससे दो वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। यह घटना और मदुरै में संरक्षण समारोह, दोनों मिलकर पुराने वृक्षों की संवेदनशीलता और उनकी सुरक्षा की जरूरत को रेखांकित करते हैं।