भारत का सेमीकंडक्टर बाजार तेज़ी से बढ़ने की राह पर
भारत का सेमीकंडक्टर बाजार आने वाले वर्षों में बड़ी छलांग लगाने की ओर बढ़ रहा है। विभिन्न आकलनों के अनुसार यह बाजार 2026 में लगभग 64 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2035 तक 200 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि एक अन्य अनुमान इसे 2035 तक 300 अरब डॉलर तक ले जाता है। 2021 में इसका आकार करीब 27 अरब डॉलर था। इसी अवधि में सेमीकंडक्टर आयात भी तेजी से बढ़े हैं, जो FY17 में 5.7 अरब डॉलर से FY25 में 30.3 अरब डॉलर तक पहुंच गए।
क्यों बढ़ रहा है सेमीकंडक्टर बाजार
सेमीकंडक्टर आधुनिक डिजिटल और औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। ये चिप्स, सेंसर, पावर डिवाइस और इंटीग्रेटेड सर्किट जैसे उत्पादों में इस्तेमाल होते हैं। भारत में इनकी मांग सिर्फ मोबाइल या कंप्यूटर तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑटोमोबाइल, औद्योगिक प्रणालियों, दूरसंचार, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और उन्नत विनिर्माण तक फैली हुई है। जैसे-जैसे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, 5G नेटवर्क, ईवी और डेटा-आधारित सेवाएं बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे सेमीकंडक्टर की जरूरत भी तेज़ी से बढ़ रही है।
कौन-से क्षेत्र सबसे आगे हैं
भारत के सेमीकंडक्टर बाजार में उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स सबसे बड़ा खंड है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 30% है। इसके बाद ऑटोमोटिव अनुप्रयोगों की हिस्सेदारी 16% और औद्योगिक अनुप्रयोगों की 15% है। यही दिखाता है कि मांग का आधार व्यापक है और यह केवल एक उद्योग तक सीमित नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, टेलीकम्युनिकेशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र आने वाले समय में इस मांग को और मजबूत कर सकते हैं।
डिज़ाइन क्षमता और सप्लाई चेन की अहमियत
भारत की एक बड़ी ताकत उसका चिप डिज़ाइन टैलेंट है। देश के पास वैश्विक चिप डिज़ाइन प्रतिभा का लगभग 20% हिस्सा है। इसमें चिप आर्किटेक्चर, वेरिफिकेशन, फिजिकल डिज़ाइन और एम्बेडेड सिस्टम्स पर काम करने वाले इंजीनियर शामिल हैं। यह क्षमता भारत को केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति देती है।
इसी पृष्ठभूमि में उद्योग रिपोर्टें भारत को एक बड़े सेमीकंडक्टर हब के रूप में देख रही हैं। EY और India Electronics and Semiconductor Association की रिपोर्ट ने 2035 तक 200 अरब डॉलर के बाजार का अनुमान दिया है, जबकि डेलॉइट की मार्च 2026 की रिपोर्ट इससे भी अधिक, 300 अरब डॉलर का अनुमान लगाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सेमीकंडक्टर का उपयोग इंटीग्रेटेड सर्किट, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार उपकरणों में होता है।
- सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में डिज़ाइन, फैब्रिकेशन, असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग शामिल होती है।
- चिप फैब्रिकेशन प्लांट को सामान्यतः फैब कहा जाता है।
- सेमीकंडक्टर निर्माण में भारी पूंजी, विशेष रसायन और अत्यंत स्वच्छ उत्पादन वातावरण की जरूरत होती है।
आयात पर बढ़ती निर्भरता और घरेलू मांग में तेज़ विस्तार यह संकेत देते हैं कि भारत के लिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बन चुका है। आने वाले वर्षों में इसकी दिशा देश की इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और डिजिटल अर्थव्यवस्था की गति तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।