भारत की रेशम उत्पादन क्षमता बढ़ाने की बड़ी योजना

भारत की रेशम उत्पादन क्षमता बढ़ाने की बड़ी योजना

भारत ने 2030-31 तक रेशम उत्पादन को 60,000 मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही देश का उद्देश्य 2028-29 तक दुनिया का सबसे बड़ा रेशम उत्पादक बनना है। यह लक्ष्य बेंगलुरु में केंद्रीय रेशम बोर्ड के 77वें स्थापना दिवस पर सामने आया, जबकि मौजूदा वार्षिक उत्पादन लगभग 42,000 मीट्रिक टन है। 2014 में यह आंकड़ा करीब 26,000 मीट्रिक टन था, यानी पिछले वर्षों में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है।

रेशम उद्योग क्यों महत्वपूर्ण है

रेशम उत्पादन केवल एक कृषि-आधारित गतिविधि नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, वस्त्र उद्योग और रोजगार से सीधे जुड़ा क्षेत्र है। भारत में मल्बरी, तसर, एरी और मुगा जैसे विभिन्न प्रकार के रेशम का उत्पादन होता है। इनमें मल्बरी रेशम का हिस्सा सबसे बड़ा है। यह क्षेत्र विशेष रूप से उन किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए अहम है, जिनकी आय खेती के साथ-साथ सहायक गतिविधियों पर निर्भर करती है।

उत्पादन बढ़ाने की रणनीति

सरकार की योजना रेशम उत्पादन की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने की है। इसमें शहतूत की खेती, रेशमकीट पालन, कोकून उत्पादन, रीलिंग और बुनाई तक की प्रक्रिया शामिल है। उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक सेरीकल्चर तकनीक, उच्च घनत्व उत्पादन पद्धतियों और गुणवत्ता सुधार उपायों पर जोर दिया जा रहा है।

केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय रेशम क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों का उपयोग भी कर रहा है। इन तकनीकों का उद्देश्य गुणवत्ता जांच को बेहतर बनाना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना और संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करना है।

केंद्रीय रेशम बोर्ड की भूमिका

केंद्रीय रेशम बोर्ड वस्त्र मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है। इसकी स्थापना 1948 में केंद्रीय रेशम बोर्ड अधिनियम, 1948 के तहत की गई थी। यह संस्था रेशम क्षेत्र में अनुसंधान, विकास और समन्वय का काम करती है। देश में रेशम उत्पादन से जुड़े मानकों, तकनीकी सहायता और नीति-समर्थन में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।

भारत दुनिया में रेशम का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है और चीन के बाद इसका स्थान आता है। कर्नाटक देश का प्रमुख रेशम उत्पादक राज्य है। ऐसे में उत्पादन लक्ष्य बढ़ाना न केवल निर्यात और उद्योग के लिए, बल्कि ग्रामीण आय और रोजगार सृजन के लिए भी अहम माना जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत में रेशम उत्पादन को सेरीकल्चर कहा जाता है, जिसमें रेशमकीट पालन और उससे जुड़ी पूरी प्रक्रिया शामिल होती है।
  • भारत में रेशम के प्रमुख प्रकार हैं: मल्बरी, तसर, एरी और मुगा।
  • कर्नाटक भारत का सबसे बड़ा रेशम उत्पादक राज्य है।
  • केंद्रीय रेशम बोर्ड की स्थापना 1948 में हुई थी और यह वस्त्र मंत्रालय के अधीन काम करता है।

रेशम उत्पादन बढ़ाने की यह योजना भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और वस्त्र क्षेत्र में देश की स्थिति को और ऊंचा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Originally written on September 21, 2026 and last modified on September 21, 2026.

1 Comment

  1. Prabhakar prasad singh

    September 22, 2026 at 1:29 pm

    Bihar sarkar ke Bhagalpur me Bihar institute of silk and textile college tha udyog vibhag ke handloom and sericulture nirdeshalay ke adhin use Bihar sarkar band kar diya jab b.sc.silk.technology (sericulture) course chalu huwa tha us samay dakshin Asia ka sabse bara degree tha wese college 1922 se hi suru tha Bihar sarkar handloom and sericulture nirdeshalay me 34 warsho se ak bhi vacancy nhi nikala sabhi technical pad khali hai lekin niyukti nhi nikala jo kuchh bhi kam ho raha hai wah jeevika ko de diya wah bhi non technical ardh technical person se kam chala raha hai technical Gyan ke abhab me Bihar sarkar ka yah department dam tor raha hai

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