स्टेलेंटिस ने तिरुवल्लूर संयंत्र पर पूरी पकड़ बनाई

स्टेलेंटिस ने तिरुवल्लूर संयंत्र पर पूरी पकड़ बनाई

स्टेलेंटिस इंडिया ने 21 सितंबर 2026 को हिंदुस्तान मोटर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड की शेष हिस्सेदारी खरीदकर तमिलनाडु के तिरुवल्लूर स्थित अपने विनिर्माण संयंत्र पर पूर्ण स्वामित्व हासिल कर लिया। इस सौदे के बाद स्टेलेंटिस ऑटोमोबाइल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पास अब इस इकाई का पूरा नियंत्रण आ गया है।

तिरुवल्लूर संयंत्र क्यों अहम है

तिरुवल्लूर प्लांट स्टेलेंटिस की भारत विनिर्माण रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां 2021 से वाहन असेंबली शुरू हुई थी और यह सुविधा अब कंपनी के घरेलू उत्पादन नेटवर्क के साथ-साथ निर्यात गतिविधियों का भी केंद्र बन चुकी है। इस संयंत्र में सिट्रोएन ब्रांड के मॉडल तैयार किए जाते हैं, जिनमें C3, ë-C3, C3 Aircross और Basalt शामिल हैं।

कंपनी के अनुसार इस संयंत्र में 95 प्रतिशत से अधिक स्थानीयकरण हासिल किया गया है। इसका अर्थ है कि वाहन निर्माण में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश पुर्जे और इनपुट भारत से ही जुटाए जा रहे हैं। इससे आयात निर्भरता घटती है और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलती है।

निवेश, उत्पादन और निर्यात का विस्तार

यह अधिग्रहण विदेशी प्रत्यक्ष निवेश यानी FDI के जरिए किया गया है। स्टेलेंटिस ने भारत में अब तक करीब 11,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। तिरुवल्लूर संयंत्र केवल घरेलू बाजार के लिए ही नहीं, बल्कि निर्यात के लिए भी महत्वपूर्ण है। यहां से चार महाद्वीपों के आठ बाजारों में वाहन भेजे जाते हैं।

स्टेलेंटिस ने आने वाले वर्षों में इस संयंत्र में उत्पादन बढ़ाने की योजना जताई है। उत्पादन विस्तार के साथ प्रत्यक्ष रोजगार बढ़ने की संभावना है, जबकि सप्लायर, लॉजिस्टिक्स और सहायक सेवाओं के जरिए अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बन सकते हैं।

भारत में स्टेलेंटिस की रणनीति और पृष्ठभूमि

स्टेलेंटिस और सीके बिड़ला समूह के बीच 2017 में विनिर्माण और मोबिलिटी साझेदारी बनी थी। स्टेलेंटिस एक बहुराष्ट्रीय ऑटोमोबाइल कंपनी है, जिसका गठन 2021 में फिएट क्रिसलर ऑटोमोबाइल्स और ग्रुप पीएसए के विलय से हुआ था। सिट्रोएन इसी समूह का फ्रांसीसी ब्रांड है, जिसे भारत में स्टेलेंटिस के उत्पाद पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा माना जाता है।

तमिलनाडु पहले से ही भारत के प्रमुख ऑटोमोबाइल विनिर्माण राज्यों में शामिल है और चेन्नई क्षेत्र में कई औद्योगिक क्लस्टर मौजूद हैं। ऐसे में तिरुवल्लूर संयंत्र पर पूर्ण नियंत्रण स्टेलेंटिस की भारत में दीर्घकालिक मौजूदगी और निर्यात-उन्मुख उत्पादन रणनीति को और मजबूत करता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • FDI यानी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में विदेशी निवेशक किसी देश की कंपनी में स्वामित्व या नियंत्रण हासिल करता है।
  • स्टेलेंटिस का गठन 2021 में फिएट क्रिसलर ऑटोमोबाइल्स और ग्रुप पीएसए के विलय से हुआ था।
  • सिट्रोएन फ्रांस का ऑटोमोबाइल ब्रांड है और स्टेलेंटिस समूह का हिस्सा है।
  • तमिलनाडु भारत के प्रमुख ऑटोमोबाइल उत्पादन राज्यों में गिना जाता है, खासकर चेन्नई क्षेत्र के औद्योगिक नेटवर्क के कारण।

तिरुवल्लूर संयंत्र पर पूर्ण स्वामित्व स्टेलेंटिस के लिए भारत में उत्पादन, निर्यात और स्थानीयकरण—तीनों मोर्चों पर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Originally written on September 21, 2026 and last modified on September 21, 2026.

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