गांधी सागर में ‘राधा’ की एंट्री से चीता पुनर्वास को नई गति
मध्य प्रदेश के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में 20 सितंबर 2026 को बोत्सवाना मूल की तीन वर्षीय मादा चीता CCB-2 को एक सुरक्षित बाड़े में छोड़ा गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राधा अष्टमी के अवसर पर इस चीते का नाम ‘राधा’ रखा। यह कदम भारत में चीता पुनर्वास कार्यक्रम को आगे बढ़ाने और अलग-अलग आबादियों के बीच प्रजनन की संभावनाएं मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गांधी सागर बना दूसरा चीता आवास
गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य मध्य प्रदेश-राजस्थान सीमा पर मंदसौर और नीमच जिलों में फैला है। अप्रैल 2025 में इसे भारत का दूसरा चीता आवास घोषित किया गया था। इससे पहले कुनो राष्ट्रीय उद्यान देश में चीतों के लिए पहला रिलीज साइट बना था। राधा को कुनो राष्ट्रीय उद्यान से गांधी सागर लाया गया है, ताकि यहां चीतों की स्थायी उपस्थिति और प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल विकसित किया जा सके।
प्रोजेक्ट चीता की रणनीति क्या है
प्रोजेक्ट चीता भारत का वह पुनर्वास कार्यक्रम है, जिसके तहत अफ्रीका से चीतों को भारतीय संरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित किया गया है। इसका उद्देश्य देश में विलुप्त हो चुके इस प्रजाति को फिर से स्थापित करना है। भारत में अंतिम ज्ञात जंगली चीता 1950 के दशक में समाप्त हो गया था, जिसके बाद इसे देश से विलुप्त घोषित किया गया। ऐसे में गांधी सागर जैसे दूसरे स्थल का विकसित होना इस परियोजना के विस्तार का संकेत है।
गांधी सागर में अब चार चीते
राधा के शामिल होने के बाद गांधी सागर में चीतों की संख्या चार हो गई है। यहां दो नर चीते पावक और प्रभास हैं, जिन्हें अप्रैल 2025 में कुनो से यहां स्थानांतरित किया गया था। दूसरी मादा चीता धीरा, जो दक्षिण अफ्रीका से लाई गई थी, सितंबर 2025 में गांधी सागर पहुंची थी। अब इस समूह में दो नर और दो मादाएं हैं, जो भविष्य में प्रजनन के लिहाज से अहम मानी जा रही हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- चीता Acinonyx वंश का सदस्य है और यह दुनिया का सबसे तेज़ स्थलीय जीव माना जाता है।
- भारत में अंतिम ज्ञात जंगली चीता 1950 के दशक में विलुप्त हो गया था।
- कुनो राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश में स्थित है और प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत का पहला चीता रिलीज साइट बना।
- गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य मंदसौर और नीमच जिलों में फैला है और अब भारत का दूसरा चीता आवास है।
कुनो में 18 सितंबर 2026 को भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 से चार शावकों का जन्म भी हुआ था। इन जन्मों के बाद देश में चीतों की कुल संख्या 56 पहुंच गई है, जो इस संरक्षण प्रयास की बढ़ती सफलता को दर्शाती है।