ग्वालियर बनेगा एशिया का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन

ग्वालियर बनेगा एशिया का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन

मध्य प्रदेश का ग्वालियर अब देश के औद्योगिक नक्शे पर एक नई पहचान बनाने जा रहा है। यहां एशिया का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ) विकसित किया जाएगा, जिसमें करीब 5,500 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इस परियोजना से 24 कंपनियों ने निवेश प्रस्ताव दिए हैं और इसके जरिए 18,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

टेलीकॉम निर्माण के लिए विशेष औद्योगिक क्लस्टर

टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन एक ऐसा औद्योगिक क्लस्टर होता है, जहां टेलीकॉम उपकरणों का उत्पादन, परीक्षण और उससे जुड़ी सहायक गतिविधियां एक ही स्थान पर विकसित की जाती हैं। ग्वालियर में प्रस्तावित यह ज़ोन भारत में टेलीकॉम हार्डवेयर निर्माण को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इसके साथ लगभग 500 करोड़ रुपये के कॉमन टेस्टिंग लैब पैकेज को भी जोड़ा गया है, ताकि उद्योगों को परीक्षण और गुणवत्ता जांच की सुविधा एक ही परिसर में मिल सके।

भूमि, निवेश और बुनियादी ढांचे की तैयारी

परियोजना के पहले चरण के लिए लगभग 170 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। इसमें 90 एकड़ से अधिक भूमि श्रीयमंत माधवराव सिंधिया काउंटर मैग्नेट सिटी (SADA) क्षेत्र में और 70 एकड़ से अधिक भूमि आईटी पार्क क्षेत्र में है। निवेशकों की रुचि उपलब्ध भूमि से अधिक होने के कारण अतिरिक्त जमीन की पहचान भी की जा रही है। राज्य सरकार की ओर से इस परियोजना के लिए प्रोत्साहन पैकेज भी तैयार किया गया है, जिससे निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

समझौते और कनेक्टिविटी ने बढ़ाई परियोजना की संभावनाएं

टेलीकॉम ज़ोन को लेकर जुलाई 2026 में दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके बाद अगस्त 2026 में दिल्ली और मुंबई में हुए निवेशक रोडशो में 5,500 करोड़ रुपये के संयुक्त निवेश प्रस्ताव मिले। ग्वालियर की कनेक्टिविटी भी इस परियोजना के लिए अनुकूल मानी जा रही है, क्योंकि यह 120 किलोमीटर लंबे आगरा-ग्वालियर हाई-स्पीड कॉरिडोर, प्रमुख रेल मार्गों और पुनर्विकसित हवाई अड्डे से जुड़ा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ग्वालियर मध्य प्रदेश में स्थित है और सिंधिया परिवार की ऐतिहासिक तथा राजनीतिक विरासत से जुड़ा शहर माना जाता है।
  • दूरसंचार विभाग भारत सरकार के संचार मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • MoU यानी समझौता ज्ञापन का उपयोग भारत में परियोजना सुविधा और सरकारी सहयोग के लिए व्यापक रूप से किया जाता है।
  • औद्योगिक ज़ोन अक्सर बेहतर सड़क, रेल और हवाई संपर्क वाले क्षेत्रों में विकसित किए जाते हैं।

कुल मिलाकर, ग्वालियर का यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन न केवल मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास को गति देगा, बल्कि भारत में टेलीकॉम उपकरण निर्माण की क्षमता को भी नई दिशा दे सकता है।

Originally written on September 21, 2026 and last modified on September 21, 2026.

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