आईओसीएल की केरल-तमिलनाडु गैस पाइपलाइन से दक्षिण भारत की ऊर्जा कनेक्टिविटी मजबूत होगी

आईओसीएल की केरल-तमिलनाडु गैस पाइपलाइन से दक्षिण भारत की ऊर्जा कनेक्टिविटी मजबूत होगी

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) ने केरल और तमिलनाडु को जोड़ने वाली कोच्चि-कन्याकुमारी-तूतीकोरिन प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना में 2,448.70 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है। यह परियोजना दक्षिण भारत में गैस आपूर्ति नेटवर्क को मजबूत करने और औद्योगिक तथा शहर गैस वितरण जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

क्या है KTPL परियोजना

कोच्चि-कन्याकुमारी-तूतीकोरिन प्राकृतिक गैस पाइपलाइन को संक्षेप में KTPL कहा जाता है। यह 424.65 किलोमीटर लंबी गैस ट्रांसमिशन परियोजना है, जो केरल के कोच्चि से शुरू होकर कन्याकुमारी क्षेत्र के रास्ते तमिलनाडु के तूतीकोरिन तक जाएगी। इसका उद्देश्य कोच्चि एलएनजी टर्मिनल से रीगैसिफाइड एलएनजी को उन क्षेत्रों तक पहुंचाना है, जहां गैस की मांग लगातार बढ़ रही है।

क्षमता और उपयोगिता

इस पाइपलाइन प्रणाली की कुल क्षमता 6.84 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन (MMSCMD) है। इसमें न्यूनतम कॉमन कैरियर क्षमता 1.71 MMSCMD तय की गई है, जो नियामकीय नियमों के तहत तीसरे पक्ष की पहुंच से जुड़ी होती है। इसका व्यावहारिक महत्व यह है कि पाइपलाइन केवल एक उपयोगकर्ता तक सीमित न रहकर कई उपभोक्ताओं और वितरकों के लिए उपलब्ध हो सकती है।

यह परियोजना विशेष रूप से शहर गैस वितरण नेटवर्क, औद्योगिक इकाइयों और ऊर्जा-आधारित गतिविधियों के लिए उपयोगी होगी। दक्षिण भारत में गैस आधारित बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ यह क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को भी सहारा दे सकती है।

नियामकीय मंजूरी और प्रक्रिया

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने 17 अप्रैल 2026 को आईओसीएल को इस पाइपलाइन को बिछाने, बनाने, संचालित करने और विस्तार करने की अनुमति दी थी। इसके बाद PNGRB ने इस परियोजना के लिए suo motu आधार पर बोली प्रक्रिया शुरू की। बोली 17 अक्टूबर 2024 से शुरू हुई थी और अंतिम जमा तिथि 18 फरवरी 2025 तय की गई थी।

यह मंजूरी भारत में गैस पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार की व्यापक नीति से भी जुड़ी है। देश में आयात टर्मिनलों, औद्योगिक क्लस्टरों और शहर गैस प्रणालियों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी बनाने के लिए ऐसी परियोजनाओं को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आईओसीएल भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन एक महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है।
  • PNGRB की स्थापना पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड अधिनियम, 2006 के तहत हुई थी।
  • एलएनजी को पाइपलाइन में भेजने से पहले टर्मिनल पर रीगैसिफाई किया जाता है।
  • कॉमन कैरियर क्षमता का संबंध पाइपलाइन में कई उपयोगकर्ताओं की पहुंच से होता है।

KTPL जैसी परियोजनाएं दक्षिण भारत में गैस आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने के साथ-साथ औद्योगिक विकास और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को भी गति दे सकती हैं।

Originally written on September 21, 2026 and last modified on September 21, 2026.

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