भारत में पहली ब्लू बॉन्ड पहल से समुद्री वित्त को नई दिशा

भारत में पहली ब्लू बॉन्ड पहल से समुद्री वित्त को नई दिशा

भारत में पहली ब्लू बॉन्ड जारी करने की तैयारी देश के सतत वित्त बाजार के लिए एक अहम कदम मानी जा रही है। राज्य-स्वामित्व वाली समुद्री ऋणदाता सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन 28 सितंबर 2026 को इस इश्यू की शुरुआत करने जा रही है। प्रस्तावित आकार 600 करोड़ रुपये है, जबकि 500 करोड़ रुपये का ग्रीनशू विकल्प भी रखा गया है। बॉन्ड की अवधि 10 वर्ष होगी।

ब्लू बॉन्ड क्या होते हैं

ब्लू बॉन्ड ऐसे ऋण साधन होते हैं जिनसे जुटाई गई राशि को समुद्र, तटीय पारिस्थितिकी तंत्र, जल प्रबंधन और ब्लू इकोनॉमी से जुड़े प्रोजेक्ट्स में लगाया जाता है। इनका उपयोग तटीय ढांचे, समुद्री संरक्षण और जल से जुड़ी सार्वजनिक सुविधाओं के वित्तपोषण में किया जाता है। इस तरह यह साधन पर्यावरणीय लक्ष्यों के साथ-साथ बुनियादी ढांचे की जरूरतों को भी पूरा करता है।

सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन की योजना

सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन इस इश्यू से जुटाई गई राशि का उपयोग समुद्री क्षेत्र में ऋण देने, ग्रीनफील्ड बंदरगाह परियोजनाओं और तटीय सड़क नेटवर्क के लिए करना चाहती है। यह योजना मौजूदा वित्त वर्ष के भीतर लागू की जाएगी। इस इश्यू के लिए एसबीआई कैपिटल मार्केट्स को अरेंजर नियुक्त किया गया है। बॉन्ड को Icra और Care से AA+ रेटिंग मिली है, जो इसकी साख और अपेक्षाकृत मजबूत भुगतान क्षमता को दर्शाती है।

नगरपालिका ब्लू बॉन्ड और बाजार का विस्तार

ब्लू फाइनेंस का दायरा केवल समुद्री परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। वडोदरा नगर निगम भी 200 करोड़ रुपये के अलग ब्लू बॉन्ड के लिए मंजूरी लेने की प्रक्रिया में है। इस प्रस्तावित राशि का उपयोग पंप हाउस, जल शोधन संयंत्र और क्लियर-वॉटर रिजर्वायर के लिए किया जाना है। इससे स्पष्ट है कि भारत में ब्लू फाइनेंस अब नगरपालिका बांड बाजार का भी हिस्सा बनता जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ब्लू बॉन्ड सतत वित्त के ऐसे साधन हैं, जिनका संबंध जल, समुद्र और तटीय परियोजनाओं से होता है।
  • ग्रीन बॉन्ड पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं के लिए होते हैं, जबकि ब्लू बॉन्ड का फोकस समुद्री और जल प्रबंधन परियोजनाओं पर होता है।
  • नगरपालिका बॉन्ड शहरी स्थानीय निकाय सार्वजनिक ढांचे के लिए जारी करते हैं।
  • Icra और Care भारत की प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों में शामिल हैं।

भारत के सतत ऋण बाजार में ग्रीन बॉन्ड और नगरपालिका बॉन्ड के बाद ब्लू बॉन्ड का जुड़ना एक नए विशेषीकृत वित्तीय खंड की शुरुआत है। इससे समुद्री अवसंरचना, जल प्रबंधन और तटीय विकास के लिए दीर्घकालिक पूंजी जुटाने के नए रास्ते खुल सकते हैं।

Originally written on September 22, 2026 and last modified on September 22, 2026.

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