मुंबई के थाने क्रीक में देश का पहला एआई-आधारित पक्षी अभयारण्य

मुंबई के थाने क्रीक में देश का पहला एआई-आधारित पक्षी अभयारण्य

महाराष्ट्र के मुंबई स्थित थाने क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य में भारत का पहला एआई-आधारित पक्षी अभयारण्य विकसित किया जाएगा। इस परियोजना का नाम ‘भांडुप बर्ड पार्क’ रखा गया है और इसे जिला नियोजन समिति के विशेष कोष से 45 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है। यह पहल संरक्षण, तकनीक और ईको-टूरिज्म को एक साथ जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण योजना मानी जा रही है।

कहां और कैसे बनेगा नया पक्षी पार्क

यह अभयारण्य थाने क्रीक के किनारे लगभग 20.09 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा। परियोजना की खास बात यह है कि कुल क्षेत्रफल में से केवल 0.35 हेक्टेयर जमीन पर ही भौतिक ढांचा बनाया जाएगा, जबकि बाकी क्षेत्र को पारिस्थितिक विशेषताओं और आवास-संबंधी सुविधाओं के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि परियोजना का मुख्य जोर निर्माण से अधिक संरक्षण पर रहेगा। थाने क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य पहले से ही अपनी जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के लिए जाना जाता है। यह एक रामसर स्थल भी है, यानी अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की सूची में शामिल क्षेत्र। ऐसे स्थानों पर विकास कार्य करते समय पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना सबसे अहम होता है।

एआई से पक्षियों की निगरानी और पहचान

इस परियोजना में 1.5 किलोमीटर के दायरे में एआई-आधारित पक्षी ट्रैकिंग और पहचान प्रणाली लगाई जाएगी। यह प्रणाली पक्षियों की गतिविधियों की रीयल-टाइम निगरानी, प्रजातियों की पहचान, केंद्रीकृत डेटा प्रबंधन और डिजिटल विश्लेषण के लिए उपयोग होगी। मशीन लर्निंग और पैटर्न रिकग्निशन जैसी तकनीकों की मदद से पक्षियों की आवाजाही, दृश्य रिकॉर्ड और आवास से जुड़ी जानकारी को समझा जा सकेगा। वन्यजीव निगरानी में ऐसी तकनीकें तेजी से उपयोगी साबित हो रही हैं, क्योंकि इनके जरिए सर्वेक्षण अधिक सटीक और डेटा-आधारित हो जाते हैं। इससे संरक्षण योजनाओं को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकता है और संवेदनशील प्रजातियों पर मानवीय दबाव भी कम किया जा सकता है।

ईको-टूरिज्म और मैंग्रोव संरक्षण का मॉडल

परियोजना में 2.16 किलोमीटर लंबा मैंग्रोव नेचर ट्रेल, ऑब्जर्वेशन टावर और व्यूइंग डेक भी शामिल हैं। मैंग्रोव खारे पानी वाले तटीय पौधे होते हैं, जो ज्वारीय क्षेत्रों में उगते हैं और मछलियों, पक्षियों तथा अन्य आर्द्रभूमि जीवों के लिए महत्वपूर्ण आवास बनाते हैं। यह योजना ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देगी, लेकिन नियंत्रित और कम-प्रभाव वाले सार्वजनिक उपयोग के साथ। भारत में कई पक्षी अभयारण्यों में संरक्षण और सीमित पर्यटन को साथ लेकर चलने की कोशिश की जाती है, ताकि लोगों को प्रकृति से जोड़ा जा सके और पारिस्थितिकी को नुकसान न पहुंचे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • थाने क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य महाराष्ट्र में स्थित है और फ्लेमिंगो तथा आर्द्रभूमि जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है।
  • रामसर स्थल वे आर्द्रभूमियाँ होती हैं जिन्हें 1971 के रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व दिया गया है।
  • वन्यजीव अध्ययन में एआई का उपयोग प्रजाति पहचान, मूवमेंट ट्रैकिंग और डेटा विश्लेषण के लिए किया जाता है।
  • मैंग्रोव तटीय सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं और कई पक्षी व समुद्री प्रजातियों के लिए प्रजनन स्थल भी होते हैं।

यह परियोजना भारत में संरक्षण तकनीक के नए उपयोग की दिशा दिखाती है। यदि इसे योजना के अनुसार लागू किया गया, तो यह पक्षी संरक्षण, आर्द्रभूमि प्रबंधन और पर्यावरण-आधारित पर्यटन का एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकता है।

Originally written on July 22, 2026 and last modified on July 22, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *