नशा-रोधी रणनीति को नई दिशा देगा एएनटीएफ सम्मेलन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। दो दिन चलने वाला यह सम्मेलन नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा आयोजित किया जा रहा है और इसमें नशीले पदार्थों पर नियंत्रण के लिए तैयार विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 पर विशेष चर्चा होगी।
सम्मेलन का फोकस: समन्वय, कार्रवाई और नेटवर्क तोड़ना
इस सम्मेलन की थीम “United Resolve, Shared Responsibility” रखी गई है, जो इस बात को रेखांकित करती है कि नशा-रोधी अभियान केवल एक एजेंसी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि केंद्र, राज्य और विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों के साझा प्रयास से ही सफल हो सकता है। देशभर के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एएनटीएफ प्रमुख इसमें हिस्सा ले रहे हैं।
कार्यक्रम में संस्थागत तंत्र को मजबूत करने, तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने, मांग में कमी, पुनर्वास, प्रवर्तन की प्रभावशीलता, प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स, अवैध खेती तथा डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े मामलों पर तकनीकी सत्र होंगे।
एनसीबी और कानूनी ढांचा
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो भारत की केंद्रीय ड्रग प्रवर्तन एजेंसी है, जो गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है। देश में नशीले पदार्थों और मनोदैहिक पदार्थों से जुड़े अपराधों का मुख्य कानूनी आधार नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज एक्ट, 1985 है। यह कानून नशीले पदार्थों के नियंत्रण, उनके अवैध व्यापार और संबंधित अपराधों को विनियमित करता है।
एएनटीएफ राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा बनाई गई विशेष इकाइयाँ हैं, जिनका काम पुलिस, सीमा शुल्क, केंद्रीय एजेंसियों और अन्य प्रवर्तन संस्थाओं के साथ मिलकर नशीले पदार्थों की तस्करी, खुफिया जानकारी साझा करने और जांच को समन्वित करना है।
ड्रग-फ्री भारत लक्ष्य और नई पहल
सरकार का लक्ष्य 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने का है। इसके लिए तस्करी नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई, रोकथाम, पुनर्वास और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय नेटवर्क के खिलाफ समन्वित अभियान पर जोर दिया जा रहा है। सरकार ने मार्च 2029 तक 100 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नारकोटिक्स नेटवर्क को ध्वस्त करने और 100 फरार आरोपियों को वापस लाने का लक्ष्य भी रखा है।
सम्मेलन के दौरान अमित शाह नशा-रोधी जागरूकता से जुड़े टेलीविजन विज्ञापन भी जारी करेंगे। इसके साथ ही लखनऊ और देहरादून में नए एनसीबी जोनल कार्यालयों की आधारशिला भी रखी जाएगी, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर प्रवर्तन और निगरानी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की स्थापना 1986 में भारत की केंद्रीय ड्रग प्रवर्तन एजेंसी के रूप में हुई थी।
- एनडीपीएस एक्ट, 1985 भारत में नशीले पदार्थों के नियंत्रण का प्रमुख कानून है।
- प्रीकर्सर केमिकल वे पदार्थ होते हैं जिनका उपयोग नशीले या मनोदैहिक पदार्थों के निर्माण में किया जाता है।
- डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग कुछ ड्रग तस्करी मामलों में पहचान छिपाने और भुगतान के लिए किया जाता है।
यह सम्मेलन नशा-रोधी नीति, प्रवर्तन और पुनर्वास को एक साझा राष्ट्रीय एजेंडा के रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।