भारत में बायोविजिलेंस कार्यक्रम से प्रत्यारोपण चिकित्सा की सुरक्षा को नई मजबूती

भारत में बायोविजिलेंस कार्यक्रम से प्रत्यारोपण चिकित्सा की सुरक्षा को नई मजबूती

भारत ने मरीजों की सुरक्षा और जैविक उत्पादों के उपयोग में निगरानी को मजबूत करने के लिए बायोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (BvPI) की शुरुआत की है। यह पहल 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 6वीं राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के दौरान सामने आई और खास तौर पर दवाओं तथा जैविक उत्पादों से जुड़ी प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की निगरानी पर केंद्रित है।

बायोविजिलेंस क्यों है जरूरी

बायोविजिलेंस स्वास्थ्य नियमन की वह व्यवस्था है, जिसमें जैविक उत्पादों के इस्तेमाल से होने वाले दुष्प्रभावों या प्रतिकूल घटनाओं पर नजर रखी जाती है। भारत में यह कार्यक्रम उन दवाओं और जैविक उत्पादों पर भी लागू होगा, जिनका उपयोग अंग और ऊतक प्रत्यारोपण में किया जाता है। प्रत्यारोपण चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाले जैविक पदार्थों की सुरक्षा सामान्य दवाओं की तुलना में अधिक विशेष निगरानी मांगती है, इसलिए यह कदम मरीज सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आईपीसी की भूमिका और निगरानी ढांचा

इस कार्यक्रम के तहत भारतीय फार्माकोपिया आयोग (Indian Pharmacopoeia Commission – IPC) अंग और ऊतक प्रत्यारोपण से जुड़े प्रतिकूल प्रभावों की निगरानी का नेतृत्व करेगा। आईपीसी भारत में दवाओं और उनसे जुड़े स्वास्थ्य उत्पादों के मानकों से संबंधित राष्ट्रीय संस्था है। इसके जरिए प्रत्यारोपण चिकित्सा में सुरक्षा रिपोर्टिंग और निगरानी की एक संगठित व्यवस्था विकसित होने की उम्मीद है।

भारत में पहले से ही फार्माकोविजिलेंस और मटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम चल रहे हैं। फार्माकोविजिलेंस दवाओं से जुड़ी सुरक्षा समस्याओं पर नजर रखता है, जबकि मटेरियोविजिलेंस चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा से संबंधित है। बायोविजिलेंस कार्यक्रम इन मौजूदा व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाते हुए जैविक उत्पादों और प्रत्यारोपण चिकित्सा के लिए अलग और विशिष्ट सुरक्षा ढांचा उपलब्ध कराता है।

राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह और राष्ट्रीय औषधि संदर्भ

राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह भारत में दवा सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला एक पेशेवर अभियान है। इसी अवसर पर 21 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय औषधि संदर्भ ग्रंथ (National Formulary of India) का 7वां संस्करण और उसका डिजिटल संस्करण भी जारी किया गया। यह दस्तावेज देश में दवाओं के मानक उपयोग और संदर्भ जानकारी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • बायोविजिलेंस का संबंध जैविक उत्पादों से होने वाली प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की निगरानी से है।
  • भारत में यह कार्यक्रम अंग और ऊतक प्रत्यारोपण में इस्तेमाल होने वाले जैविक उत्पादों पर भी लागू होगा।
  • भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) दवाओं और संबंधित स्वास्थ्य उत्पादों के मानकों से जुड़ी राष्ट्रीय संस्था है।
  • 21 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय औषधि संदर्भ ग्रंथ का 7वां संस्करण और उसका डिजिटल संस्करण जारी किया गया।

इस पहल से भारत की दवा-सुरक्षा व्यवस्था और अधिक व्यापक होने की उम्मीद है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां जैविक सामग्री और प्रत्यारोपण उपचार के कारण निगरानी की विशेष जरूरत होती है।

Originally written on September 21, 2026 and last modified on September 21, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *