केंद्र सरकार ने जारी किए दूरसंचार (टेलीविजन, रेडियो एवं संबद्ध सेवाएं) नियम, 2026 के मसौदा नियम

केंद्र सरकार ने जारी किए दूरसंचार (टेलीविजन, रेडियो एवं संबद्ध सेवाएं) नियम, 2026 के मसौदा नियम

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 12 जून 2026 को सार्वजनिक परामर्श के लिए दूरसंचार (टेलीविजन, रेडियो एवं संबद्ध सेवाएं) नियम, 2026 का मसौदा जारी किया है। इन प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य टेलीविजन, रेडियो, डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच), हेडएंड-इन-द-स्काई (एचआईटीएस), सामुदायिक रेडियो और इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (आईपीटीवी) जैसी सेवाओं के लिए एकीकृत नियामक ढांचा तैयार करना है। यह ढांचा दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत लागू किया जाएगा और प्रसारण क्षेत्र में लंबे समय से अलग-अलग नीतियों के माध्यम से संचालित व्यवस्थाओं को एकीकृत करेगा।

किन सेवाओं को किया गया शामिल?

मसौदा नियमों के तहत टेलीविजन चैनल, टेलीविजन वितरण सेवाएं, टेलीपोर्ट, टेलीविजन समाचार एजेंसियां, निजी रेडियो सेवाएं और सामुदायिक रेडियो सेवाएं शामिल की गई हैं। पिछले लगभग दो दशकों से इन सेवाओं का संचालन अलग-अलग नीतिगत दिशानिर्देशों के माध्यम से किया जा रहा था। नई व्यवस्था का उद्देश्य इन सभी सेवाओं के लिए एक समान और स्पष्ट नियामक प्रणाली स्थापित करना है।

दूरसंचार अधिनियम, 2023 का महत्व

दूरसंचार अधिनियम, 2023 ने भारत के औपनिवेशिक काल के भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 का स्थान लिया है। यह नया कानून दूरसंचार और उससे संबंधित सेवाओं के लाइसेंस, प्राधिकरण और नियमन के लिए आधुनिक कानूनी आधार प्रदान करता है। सरकार का मानना है कि तेजी से बदलती तकनीक और डिजिटल संचार सेवाओं की आवश्यकताओं को देखते हुए पुराने कानूनों को बदलना आवश्यक था। नया अधिनियम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।

नई प्राधिकरण प्रणाली और डिजिटल प्रक्रिया

मसौदा नियमों में प्राधिकरणों को छह अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे लाइसेंस प्राप्त करने और नियामकीय अनुपालन को अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जा सके। नियमों के अनुसार अब ‘ग्रांट ऑफ परमिशन एग्रीमेंट’ (GOPA) पर हस्ताक्षर करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी जाएगी। इसके अतिरिक्त विवादों और नियामकीय मामलों के समाधान के लिए एक पारदर्शी न्यायिक तंत्र भी प्रस्तावित किया गया है।

प्रसारण सामग्री से जुड़ी नई शर्तें

मसौदा नियमों में यह प्रस्ताव किया गया है कि अधिकृत टेलीविजन चैनलों को प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तक राष्ट्रीय महत्व और सामाजिक सरोकारों से संबंधित कार्यक्रमों का प्रसारण करना होगा। यह प्रसारण सुबह 6 बजे से रात 11 बजे के बीच किया जाना अनिवार्य होगा। सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक हित से जुड़े विषयों को अधिक प्रभावी ढंग से दर्शकों तक पहुंचाना है।

लाइसेंस अवधि में बदलाव

प्रस्तावित नियमों के अनुसार विभिन्न सेवाओं के लिए अलग-अलग प्राधिकरण अवधि निर्धारित की गई है।

  • टेलीविजन चैनलों और सामुदायिक रेडियो स्टेशनों के लिए 10 वर्ष।
  • डीटीएच और एचआईटीएस जैसी टेलीविजन वितरण सेवाओं के लिए 20 वर्ष।
  • निजी एफएम रेडियो ऑपरेटरों के लिए 15 वर्ष।

मसौदे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निजी एफएम रेडियो लाइसेंसों का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा, जो इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

सार्वजनिक परामर्श की प्रक्रिया

मंत्रालय ने सभी हितधारकों, उद्योग संगठनों और आम नागरिकों को मसौदा नियमों पर सुझाव और टिप्पणियां भेजने के लिए आमंत्रित किया है। इस संबंध में प्रतिक्रिया देने की अंतिम तिथि 27 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम नियमों को तैयार किया जाएगा और उसके बाद इन्हें लागू किया जा सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • दूरसंचार अधिनियम, 2023 ने भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 का स्थान लिया है।
  • डीटीएच (Direct-to-Home) और एचआईटीएस (Headend-in-the-Sky) भारत में प्रमुख टेलीविजन वितरण प्लेटफॉर्म हैं।
  • सामुदायिक रेडियो स्टेशन केंद्र सरकार की अनुमति के आधार पर संचालित होते हैं।
  • ग्रांट ऑफ परमिशन एग्रीमेंट को संक्षेप में GOPA कहा जाता है।
  • इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (IPTV) इंटरनेट नेटवर्क के माध्यम से टीवी सेवाएं प्रदान करता है।

दूरसंचार (टेलीविजन, रेडियो एवं संबद्ध सेवाएं) नियम, 2026 का मसौदा भारत के प्रसारण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार का संकेत देता है। एकीकृत नियामक ढांचे, डिजिटल प्रक्रियाओं और स्पष्ट प्राधिकरण प्रणाली के माध्यम से सरकार प्रसारण सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सरल और तकनीक-अनुकूल बनाने का प्रयास कर रही है। आने वाले समय में यह ढांचा भारत के मीडिया और प्रसारण उद्योग के विकास को नई दिशा दे सकता है।

Originally written on June 12, 2026 and last modified on June 12, 2026.

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