केंद्र सरकार ने एफसीआरए नियमों में किए महत्वपूर्ण संशोधन
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 22 जून 2026 को राजपत्र अधिसूचना जारी कर विदेशी अंशदान (विनियमन) नियम, 2011 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। ये बदलाव विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 के तहत पंजीकरण और नवीनीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और निगरानी योग्य बनाने के उद्देश्य से किए गए हैं। नए नियमों का प्रभाव उन सभी गैर-सरकारी संगठनों, संस्थाओं और संघों पर पड़ेगा जो विदेश से वित्तीय सहायता प्राप्त करते हैं।
एफसीआरए क्या है और इसका महत्व
विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 भारत में विदेशी स्रोतों से प्राप्त होने वाले दान, अनुदान और अन्य वित्तीय योगदानों को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है। यह अधिनियम व्यक्तियों, संस्थाओं, संघों और कंपनियों द्वारा विदेशी योगदान के प्राप्ति, उपयोग और हस्तांतरण को विनियमित करता है। इसके तहत बनाए गए विदेशी अंशदान (विनियमन) नियम, 2011 आवेदन प्रक्रिया, सूचना प्रकटीकरण और अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को निर्धारित करते हैं। एफसीआरए का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन का उपयोग घोषित सामाजिक, शैक्षिक, धार्मिक या विकासात्मक उद्देश्यों के लिए ही किया जाए।
आवेदन प्रक्रिया में नए बदलाव
संशोधित नियमों के अनुसार एफसीआरए पंजीकरण या नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाले संगठनों को अब पूर्वनिर्धारित सूची में से अपने उद्देश्य और कार्यक्षेत्र का चयन करना होगा। इसके साथ ही उन्हें उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का स्पष्ट उल्लेख करना होगा जहां वे अपनी गतिविधियां संचालित करना चाहते हैं। नए प्रावधानों के तहत आवेदकों को अपने सोशल मीडिया खातों की जानकारी भी आवेदन के दौरान देनी होगी। यदि विदेशी धन किसी मध्यस्थ वित्तीय माध्यम या डोनर एडवाइज्ड फंड के जरिए प्राप्त होता है, तो संगठन को मूल दाता की पहचान भी बतानी होगी। इसके अतिरिक्त प्रत्येक अतिरिक्त राज्य या उद्देश्य को आवेदन में शामिल करने पर 300 रुपये का अतिरिक्त शुल्क निर्धारित किया गया है।
पात्रता और अनुपालन संबंधी शर्तें
संशोधित नियमों में पात्रता मानदंड भी कड़े किए गए हैं। यदि किसी संस्था के प्रमुख पदाधिकारियों या कार्यकारी पदों पर विदेशी नागरिक नियुक्त हैं, तो सामान्य परिस्थितियों में उसे एफसीआरए पंजीकरण या पूर्व स्वीकृति नहीं मिलेगी। हालांकि सरकार विशेष आदेश के माध्यम से कुछ मामलों में छूट प्रदान कर सकती है। नियमों के अनुसार किसी संस्था को अपना पंजीकरण बनाए रखने या नवीनीकरण प्राप्त करने के लिए पिछले दो वित्तीय वर्षों के दौरान विदेशी अंशदान से कम से कम 10 लाख रुपये अपने घोषित उद्देश्यों पर खर्च करना होगा। इसके अलावा 2026 से पहले पंजीकृत संस्थाओं को एक वर्ष के भीतर सरकार को उन उद्देश्यों और राज्यों की जानकारी देनी होगी जिन्हें वे अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र में बनाए रखना चाहती हैं।
“प्रमुख कार्यकारी” की नई परिभाषा
नियमों में “प्रमुख कार्यकारी” या “की फंक्शनरी” की परिभाषा का भी विस्तार किया गया है। अब इसमें कंपनी के निदेशक, साझेदारी फर्म के भागीदार, ट्रस्टी, हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) के कर्ता तथा संस्था के प्रबंधन को नियंत्रित करने वाला कोई भी व्यक्ति शामिल होगा। यह परिभाषा एफसीआरए से संबंधित आवेदन, जवाबदेही और नियंत्रण निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे संस्थाओं की प्रशासनिक संरचना को अधिक स्पष्ट रूप से समझने और निगरानी करने में सहायता मिलेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 का प्रशासन केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
- विदेशी अंशदान (विनियमन) नियम, 2011 एफसीआरए, 2010 के तहत बनाए गए नियम हैं।
- भारत में विदेशी योगदान प्राप्त करने के दो प्रमुख माध्यम हैं—एफसीआरए पंजीकरण और पूर्व स्वीकृति।
- “विदेशी अंशदान” की परिभाषा एफसीआरए, 2010 में दी गई है, जिसमें विदेशी स्रोतों से प्राप्त दान और वित्तीय सहायता शामिल हैं।
एफसीआरए नियमों में किए गए ये संशोधन विदेशी धन के उपयोग में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। नए प्रावधानों से सरकार को विदेशी अंशदान के स्रोत, उपयोग और प्रभाव की बेहतर निगरानी करने में सहायता मिलेगी, जबकि संगठनों को भी अपनी गतिविधियों और वित्तीय संचालन को अधिक व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना होगा।