इंदौरी मालवी आलू को मिला जीआई टैग

इंदौरी मालवी आलू को मिला जीआई टैग

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध इंदौरी मालवी आलू को 13 जून 2026 को चेन्नई स्थित भौगोलिक संकेतक (जीआई) रजिस्ट्रार द्वारा आधिकारिक रूप से जीआई टैग प्रदान किया गया। यह उपलब्धि राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह उन 12 क्षेत्रीय कृषि उत्पादों में शामिल है जिन्हें प्रस्तावित 18 उत्पादों में से जीआई प्रमाणन प्राप्त हुआ है। जीआई टैग मिलने से इस विशेष आलू की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत होगी तथा किसानों को बेहतर बाजार अवसर प्राप्त होने की उम्मीद है।

जीआई टैग क्या है और इसका महत्व

भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication) टैग बौद्धिक संपदा संरक्षण का एक विशेष रूप है, जो उन उत्पादों को दिया जाता है जिनकी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशिष्ट विशेषताएं किसी खास भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती हैं। भारत में जीआई पंजीकरण का संचालन ‘भौगोलिक संकेतक वस्तु (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999’ के तहत किया जाता है। जीआई टैग किसी उत्पाद की विशिष्ट पहचान को सुरक्षित रखने के साथ-साथ नकली उत्पादों पर रोक लगाने में भी मदद करता है। इससे स्थानीय उत्पादकों को आर्थिक लाभ मिलता है और पारंपरिक कृषि एवं शिल्प विरासत को संरक्षण मिलता है।

इंदौरी मालवी आलू की विशेषताएं

मालवी आलू अपनी कम शर्करा (लो शुगर) और कम स्टार्च (लो स्टार्च) मात्रा के कारण विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि तलने के बाद भी इसका रंग सफेद बना रहता है, जिससे यह चिप्स और फ्रेंच फ्राइज बनाने के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। इंदौर के लोकप्रिय स्ट्रीट फूड जैसे आलू चाट, पोहा, आलू बड़ा और खोपरा पेटिस में भी इस आलू का व्यापक उपयोग किया जाता है। इसकी गुणवत्ता और स्वाद ने इसे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में विशेष स्थान दिलाया है।

उत्पादन और उद्योगों से जुड़ाव

इंदौर जिले में लगभग 45,000 हेक्टेयर क्षेत्र में इस फसल की खेती की जाती है। इस खेती से लगभग 30,000 से 35,000 किसान जुड़े हुए हैं। क्षेत्र के किसानों द्वारा उत्पादित प्रसंस्करण-ग्रेड आलू की खरीद कई प्रमुख खाद्य एवं कृषि-उद्योग कंपनियां करती हैं। आईटीसी, महिंद्रा, पेप्सिको, बालाजी, मैक्केन और हाईफन सीड्स जैसी कंपनियां स्थानीय किसानों से आलू खरीदकर विभिन्न खाद्य उत्पादों के निर्माण में उपयोग करती हैं। इससे किसानों को स्थिर बाजार और बेहतर आय प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

मध्य प्रदेश के अन्य जीआई प्रमाणित उत्पाद

इंदौरी मालवी आलू के साथ-साथ रतलाम जिले के गराडू कंद और बालम खीरा को भी जीआई प्रमाणन प्राप्त हुआ है। यह दर्शाता है कि मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट कृषि उत्पादों की समृद्ध परंपरा मौजूद है। जीआई प्रमाणन इन उत्पादों की विशिष्ट पहचान को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत में जीआई पंजीकरण का संचालन ‘भौगोलिक संकेतक वस्तु (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999’ के तहत किया जाता है।
  • जीआई टैग कृषि उत्पादों, हस्तशिल्प, खाद्य पदार्थों और विनिर्मित वस्तुओं को प्रदान किया जा सकता है।
  • दार्जिलिंग चाय भारत का पहला जीआई टैग प्राप्त उत्पाद माना जाता है।
  • कांचीपुरम सिल्क, अल्फांसो आम और बनारसी साड़ी भी भारत के प्रसिद्ध जीआई टैग प्राप्त उत्पादों में शामिल हैं।

इंदौरी मालवी आलू को जीआई टैग मिलना न केवल किसानों के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह क्षेत्रीय कृषि उत्पादों की विशिष्टता और गुणवत्ता को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। इससे स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और उत्पाद की बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।

Originally written on June 23, 2026 and last modified on June 23, 2026.

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