ओडिशा सरकार ने 10 वर्षीय डीप सी फिशिंग मिशन को दी मंजूरी

ओडिशा सरकार ने 10 वर्षीय डीप सी फिशिंग मिशन को दी मंजूरी

समुद्री मत्स्य क्षेत्र को नई गति देने और तटीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से ओडिशा मंत्रिमंडल ने 1 जुलाई 2026 को डीप सी फिशिंग मिशन को मंजूरी प्रदान की। यह ओडिशा सरकार के मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास विभाग की प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य गहरे समुद्र में टिकाऊ मत्स्य पालन को बढ़ावा देना, समुद्री अवसंरचना का विकास करना, निर्यात बढ़ाना तथा तटीय क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। यह मिशन राज्य की ब्लू इकोनॉमी रणनीति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मिशन की रूपरेखा

डीप सी फिशिंग मिशन वर्ष 2026 से 2036 तक कुल 10 वर्षों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इस मिशन पर लगभग ₹2,295.45 करोड़ से ₹2,295.46 करोड़ तक का निवेश प्रस्तावित है, जिसे विभिन्न चरणों में केंद्र और राज्य सरकार की सहायता, लाभार्थियों की भागीदारी, संस्थागत वित्त तथा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा। इस व्यापक निवेश का उद्देश्य आधुनिक मत्स्य अवसंरचना विकसित करना, समुद्री संसाधनों का टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित करना तथा मछुआरा समुदाय की आय और आजीविका में सुधार करना है।

मिशन के प्रमुख उद्देश्य

इस मिशन का मुख्य लक्ष्य गहरे समुद्र में वैज्ञानिक और सतत मत्स्य पालन को बढ़ावा देना है। इसके अंतर्गत समुद्री मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि, समुद्री खाद्य उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहन तथा तटीय समुदायों के आर्थिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वर्ष 2036 तक इस मिशन के माध्यम से प्रतिवर्ष अतिरिक्त दो लाख मीट्रिक टन समुद्री मछली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही 50,000 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने तथा समुद्री उत्पादों के वार्षिक निर्यात को लगभग ₹5,000 करोड़ तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।

ब्लू इकोनॉमी हब की स्थापना

मिशन के प्रभावी संचालन के लिए एक समर्पित ब्लू इकोनॉमी हब (बी-हब) स्थापित किया जाएगा। यह हब ज्ञान, नवाचार, अनुसंधान और समन्वय का प्रमुख केंद्र होगा। इसके माध्यम से आधुनिक तकनीकों, प्रशिक्षण, अनुसंधान और नीति निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा। ब्लू इकोनॉमी का अर्थ समुद्री संसाधनों का सतत एवं जिम्मेदार उपयोग करते हुए आर्थिक विकास, मत्स्य पालन, समुद्री परिवहन, पर्यटन और तटीय आजीविका को बढ़ावा देना है। यह अवधारणा पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करने पर आधारित है।

भारत में समुद्री मत्स्य क्षेत्र का महत्व

भारत का समुद्री मत्स्य क्षेत्र अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के विस्तृत समुद्री तटों पर आधारित है। गहरे समुद्र में मत्स्य पालन के लिए आधुनिक यांत्रिक नौकाओं का उपयोग किया जाता है, जो तटीय क्षेत्रों से दूर समुद्री जल में संचालित होती हैं। बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित ओडिशा की लंबी समुद्री तटरेखा राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इसलिए डीप सी फिशिंग मिशन राज्य के मत्स्य उद्योग, निर्यात और तटीय समुदायों के समग्र विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ओडिशा की लंबी समुद्री तटरेखा बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित है और समुद्री मत्स्य पालन उसकी तटीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें सरकार और निजी क्षेत्र परियोजना के वित्तपोषण, निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी साझा करते हैं।
  • भारत में मत्स्य पालन को मुख्य रूप से अंतर्देशीय मत्स्य पालन और समुद्री मत्स्य पालन में वर्गीकृत किया जाता है।
  • ओडिशा का मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास विभाग राज्य में मत्स्य क्षेत्र से संबंधित योजनाओं और प्रशासन का संचालन करता है।

ओडिशा का डीप सी फिशिंग मिशन समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग, मत्स्य उत्पादन में वृद्धि और तटीय समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। यदि निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार इसका सफल क्रियान्वयन होता है, तो यह न केवल राज्य की ब्लू इकोनॉमी को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएगा, बल्कि भारत के समुद्री मत्स्य और निर्यात क्षेत्र को भी महत्वपूर्ण मजबूती प्रदान करेगा।

Originally written on July 2, 2026 and last modified on July 2, 2026.

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