ओडिशा में नया कृषि विपणन कानून: राज्य बनेगा एकीकृत कृषि बाजार
14 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई ओडिशा मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के लिए एक नए कृषि विपणन कानून को लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस नए कानून का उद्देश्य वर्ष 1956 के ओडिशा कृषि उपज बाजार (ओएपीएम) अधिनियम को निरस्त करना है, जो वर्ष 1957 से लागू है। प्रस्तावित कानून के माध्यम से राज्य में कृषि उपज और पशुधन के व्यापार को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
कृषि विपणन का महत्व
भारत में कृषि विपणन के अंतर्गत कृषि उपज और पशुधन की खरीद-बिक्री, भंडारण, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण तथा परिवहन जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं। विभिन्न राज्यों के कृषि विपणन कानून मंडियों के संचालन, बाजार शुल्क, व्यापारिक लाइसेंस और कृषि वस्तुओं के व्यापारिक प्लेटफॉर्म को नियंत्रित करते हैं। प्रभावी कृषि विपणन व्यवस्था किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र की समग्र दक्षता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रस्तावित कानून की प्रमुख विशेषताएं
प्रस्तावित कानून के अनुसार ओडिशा में कृषि उपज और पशुधन की खरीद-बिक्री पर लागू भौगोलिक प्रतिबंध समाप्त कर दिए जाएंगे। इसके बाद पूरा राज्य एक एकीकृत कृषि बाजार के रूप में कार्य करेगा, जिससे किसानों और व्यापारियों को अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। नई व्यवस्था में प्रत्यक्ष विपणन, ई-ट्रेडिंग और इलेक्ट्रॉनिक नीलामी जैसी आधुनिक प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही पूरे राज्य में एकल व्यापारिक लाइसेंस और बाजार शुल्क की एकल बिंदु व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे व्यापारिक प्रक्रियाएं सरल और अधिक सुगम बनेंगी। इसके अतिरिक्त गोदामों, कोल्ड स्टोरेज और साइलो को बाजार उप-यार्ड घोषित किया जाएगा। इससे कृषि उपज के सुरक्षित भंडारण, बेहतर परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में सहायता मिलेगी तथा फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आने की संभावना है।
मॉडल कानून से मेल और संभावित प्रभाव
ओडिशा का प्रस्तावित कानून केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2017 में जारी मॉडल कृषि उपज एवं पशुधन विपणन (संवर्धन एवं सुविधा) अधिनियम के अनुरूप तैयार किया गया है। इस मॉडल कानून का उद्देश्य कृषि बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना, निजी निवेश को प्रोत्साहित करना और किसानों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना है। एकीकृत लाइसेंस, इलेक्ट्रॉनिक नीलामी और बाजार उप-यार्ड जैसी व्यवस्थाएं पहले से ही कई राज्यों में कृषि बाजार सुधारों का हिस्सा हैं। इन सुधारों के माध्यम से किसानों को अधिक व्यापारिक विकल्प मिलते हैं, बेहतर मूल्य खोज की सुविधा प्राप्त होती है तथा आधुनिक भंडारण और लॉजिस्टिक्स के कारण कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और उपलब्धता में सुधार होता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- वर्ष 1956 में ओडिशा कृषि उपज बाजार अधिनियम बनाया गया था, जबकि यह वर्ष 1957 से प्रभावी हुआ।
- मॉडल कृषि उपज एवं पशुधन विपणन (संवर्धन एवं सुविधा) अधिनियम केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2017 में जारी किया गया था।
- एकल व्यापारिक लाइसेंस के माध्यम से व्यापारी एक ही अनुमति के आधार पर व्यापक क्षेत्र में व्यापार कर सकता है।
- इलेक्ट्रॉनिक नीलामी प्रणाली डिजिटल बोली के माध्यम से कृषि उत्पादों की पारदर्शी मूल्य खोज सुनिश्चित करती है।
प्रस्तावित कृषि विपणन कानून ओडिशा में कृषि व्यापार को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि यह कानून प्रभावी रूप से लागू होता है, तो किसानों को बेहतर बाजार पहुंच, व्यापार में अधिक प्रतिस्पर्धा, आधुनिक भंडारण सुविधाओं का लाभ तथा कृषि उपज के लिए अधिक अनुकूल व्यापारिक वातावरण प्राप्त होने की संभावना है।