ईरान के परमाणु स्थलों पर निरीक्षण की तैयारी में आईएईए, परमाणु निगरानी पर बढ़ी वैश्विक नजर
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने 24 जून 2026 को संकेत दिया है कि वह ईरान के परमाणु संवर्धन स्थलों का निरीक्षण फिर से शुरू कर सकती है। आईएईए के महानिदेशक Rafael Mariano Grossi ने टोक्यो में कहा कि प्रस्तावित निरीक्षण अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक अंतरिम समझौते का हिस्सा हैं, जो हालिया संघर्ष के बाद परमाणु गतिविधियों की निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस घटनाक्रम को वैश्विक परमाणु सुरक्षा और अप्रसार व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आईएईए और परमाणु निगरानी व्यवस्था
आईएईए की स्थापना वर्ष 1957 में हुई थी और इसका मुख्यालय Vienna में स्थित है। यह संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था है, जिसका प्रमुख कार्य यह सुनिश्चित करना है कि परमाणु सामग्री और तकनीक का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाए। आईएईए की सेफगार्ड्स प्रणाली के अंतर्गत परमाणु सामग्री, परमाणु संयंत्रों और संबंधित गतिविधियों का सत्यापन किया जाता है। एजेंसी यूरेनियम संवर्धन, परमाणु भंडार तथा घोषित परमाणु स्थलों की नियमित जांच करती है ताकि किसी भी संभावित सैन्य उपयोग को रोका जा सके।
ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्र
ईरान के प्रमुख परमाणु स्थलों में Fordow Fuel Enrichment Plant, Natanz Nuclear Facility और Isfahan Nuclear Technology Center शामिल हैं। ये केंद्र यूरेनियम संवर्धन, रूपांतरण और भंडारण गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। आईएईए की रिपोर्ट के अनुसार 31 मई 2025 तक ईरान के पास 60 प्रतिशत शुद्धता तक संवर्धित 400 किलोग्राम से अधिक यूरेनियम मौजूद था। यह स्तर सामान्य नागरिक परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में प्रयुक्त निम्न-संवर्धित यूरेनियम की तुलना में काफी अधिक है और हथियार-ग्रेड सामग्री के अधिक निकट माना जाता है।
युद्ध के बाद निरीक्षण पर विवाद
2025 में हुए 12-दिवसीय संघर्ष के बाद ईरान ने अपने कई संवर्धन स्थलों तक आईएईए की पहुंच को काफी हद तक सीमित कर दिया था। अब चर्चा में मौजूद समझौते के तहत उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम संवर्धन स्तर तक लाने (Downblending) का प्रावधान भी शामिल है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने 23 जून 2026 को कहा कि क्षतिग्रस्त परमाणु स्थलों पर आईएईए निरीक्षकों की यात्रा की फिलहाल कोई योजना नहीं है। दूसरी ओर, Donald Trump ने दावा किया कि ईरान निरीक्षणों के लिए सहमत हो गया है, जबकि JD Vance ने कहा कि निरीक्षक उसी सप्ताह वापस लौट सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून और सेफगार्ड्स
आईएईए की निरीक्षण व्यवस्था मुख्य रूप से Treaty on the Non-Proliferation of Nuclear Weapons और विभिन्न द्विपक्षीय सेफगार्ड्स समझौतों पर आधारित है। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परमाणु सामग्री को शांतिपूर्ण उपयोग से हटाकर सैन्य उद्देश्यों के लिए न प्रयोग किया जाए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की स्थापना वर्ष 1957 में हुई थी।
- आईएईए का मुख्यालय वियना, ऑस्ट्रिया में स्थित है।
- फोरदो, नतांज और इस्फहान ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्र हैं।
- 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम सामान्य नागरिक परमाणु रिएक्टरों में उपयोग होने वाले स्तर से काफी अधिक माना जाता है।
- डाउनब्लेंडिंग वह प्रक्रिया है जिसमें उच्च संवर्धित यूरेनियम के संवर्धन स्तर को कम किया जाता है।
- परमाणु अप्रसार संधि (NPT) वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था का प्रमुख आधार है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आईएईए की संभावित वापसी वैश्विक सुरक्षा और परमाणु अप्रसार प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि निरीक्षण दोबारा शुरू होते हैं, तो इससे ईरान की परमाणु गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।