भारत और इज़राइल के बीच सार्वजनिक लेखा परीक्षा सहयोग पर समझौता
भारत और इज़राइल ने 23 जून 2026 को सार्वजनिक क्षेत्र की लेखा परीक्षा और वित्तीय निगरानी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) और इज़राइल की सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्था के बीच संपन्न हुआ। इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के लेखा परीक्षा संस्थानों के बीच ज्ञान, तकनीकी विशेषज्ञता और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करना है। यह समझौता पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
समझौता ज्ञापन का उद्देश्य
समझौता ज्ञापन सार्वजनिक संस्थानों के बीच सहयोग के क्षेत्रों को औपचारिक रूप से दर्ज करने का एक माध्यम होता है। भारत और इज़राइल के बीच हुए इस समझौते में पेशेवर ज्ञान के आदान-प्रदान, लेखा परीक्षा पद्धतियों, तकनीकी विशेषज्ञता, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सर्वोत्तम प्रशासनिक प्रथाओं पर सहयोग का प्रावधान किया गया है। इस समझौते के माध्यम से दोनों देशों की सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थाएं आधुनिक लेखा परीक्षा तकनीकों, प्रदर्शन मूल्यांकन और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन से जुड़े अनुभव साझा कर सकेंगी। इससे सरकारी कार्यक्रमों की प्रभावशीलता और वित्तीय पारदर्शिता को और मजबूत करने में सहायता मिलेगी।
प्रमुख संस्थाएं और पदाधिकारी
भारत की ओर से इस समझौते में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की संस्था शामिल रही। सीएजी भारत का एक संवैधानिक प्राधिकरण है, जिसकी स्थापना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के अंतर्गत की गई है। इसका मुख्य कार्य केंद्र और राज्य सरकारों के खातों तथा सार्वजनिक व्यय का लेखा परीक्षण करना है। इज़राइल की ओर से इस सहयोग का नेतृत्व मटन्याहू एंगलमैन ने किया। वे इज़राइल के स्टेट कंट्रोलर एवं लोकपाल के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे यूरोपीय सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थानों के संगठन (यूरोसाई) के अध्यक्ष भी हैं।
लेखा परीक्षा सहयोग और पेशेवर आदान-प्रदान
बैठक के दौरान भारत और इज़राइल में द्विपक्षीय संगोष्ठियों के आयोजन की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। ऐसी संगोष्ठियां सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थानों के बीच अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण माध्यम होती हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदर्शन लेखा परीक्षा, सरकारी योजनाओं के मूल्यांकन, जोखिम प्रबंधन और संस्थागत प्रक्रियाओं से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञता विकसित की जा सकेगी। इससे दोनों देशों की लेखा परीक्षा प्रणालियों में नवाचार और दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।
सार्वजनिक क्षेत्र की लेखा परीक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका
इस अवसर पर मटन्याहू एंगलमैन ने सार्वजनिक क्षेत्र की लेखा परीक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर व्याख्यान भी दिया। उन्होंने बताया कि आधुनिक लेखा परीक्षा में एआई आधारित तकनीकें तेजी से महत्वपूर्ण होती जा रही हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग बड़े डेटा विश्लेषण, पैटर्न पहचान, जोखिम मूल्यांकन और निर्णय सहायता प्रणालियों में किया जाता है। इससे लेखा परीक्षकों को अनियमितताओं का पता लगाने और सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता का अधिक सटीक मूल्यांकन करने में सहायता मिलती है। सार्वजनिक क्षेत्र की लेखा परीक्षा का उद्देश्य सार्वजनिक धन के उपयोग की जांच करना, नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करना तथा सरकारी कार्यक्रमों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना है। इसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन प्रमुख लक्ष्य होते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) का पद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के अंतर्गत स्थापित किया गया है।
- सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थाएं सरकारी खातों और सार्वजनिक व्यय का स्वतंत्र लेखा परीक्षण करती हैं।
- यूरोसाई (EUROSAI) का पूरा नाम यूरोपियन ऑर्गनाइजेशन ऑफ सुप्रीम ऑडिट इंस्टीट्यूशंस है।
- सार्वजनिक क्षेत्र की लेखा परीक्षा का उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को बढ़ावा देना है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग आधुनिक लेखा परीक्षा में डेटा विश्लेषण, पैटर्न पहचान और जोखिम मूल्यांकन के लिए किया जाता है।
भारत और इज़राइल के बीच यह सहयोग सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन और लेखा परीक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगा। आधुनिक तकनीकों, विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग के साथ यह साझेदारी भविष्य में अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नवोन्मेषी लेखा परीक्षा प्रणालियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।