संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने शांति सैनिकों पर हमलों के खिलाफ जवाबदेही बढ़ाने हेतु प्रस्ताव 2823 अपनाया

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने शांति सैनिकों पर हमलों के खिलाफ जवाबदेही बढ़ाने हेतु प्रस्ताव 2823 अपनाया

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने 23 जून 2026 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव 2823 (2026) को अपनाया, जिसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए जवाबदेही को मजबूत करना है। इस प्रस्ताव का मसौदा डेनमार्क और पाकिस्तान ने तैयार किया था, जो 2025-2026 के दौरान सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य रहे हैं। यह प्रस्ताव शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन पर हमले करने वाले अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की भूमिका

संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक संघर्षग्रस्त और संघर्षोत्तर क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए तैनात किए जाते हैं। ये सैनिक संयुक्त राष्ट्र के ध्वज के तहत कार्य करते हैं और सुरक्षा परिषद द्वारा अधिकृत मिशनों का हिस्सा होते हैं। शांति सैनिकों पर होने वाले अपराधों में हमले, हत्या, अपहरण और अन्य हिंसक गतिविधियां शामिल होती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों के लिए गंभीर चुनौती पैदा करती हैं।

प्रस्ताव 2823 (2026) की प्रमुख विशेषताएं

प्रस्ताव 2823 का मुख्य उद्देश्य शांति सैनिकों के खिलाफ अपराध करने वाले व्यक्तियों की पहचान, जांच और अभियोजन को मजबूत करना है। इसके तहत मेजबान देशों की जिम्मेदारी को दोहराया गया है कि वे अपने क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र कर्मियों के खिलाफ हुए अपराधों की निष्पक्ष जांच करें और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार दोषियों को दंडित करें। प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र महासचिव से शांति सैनिकों के खिलाफ अपराधों की जवाबदेही से संबंधित मामलों के लिए एक वरिष्ठ संपर्क अधिकारी (Senior Focal Point) नियुक्त करने का अनुरोध किया गया है। साथ ही, जांच और अभियोजन की स्थिति पर वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी प्रावधान किया गया है। पहली रिपोर्ट 120 दिनों के भीतर प्रस्तुत की जाएगी।

वैश्विक समर्थन और पूर्व प्रयास

इस प्रस्ताव को 150 से अधिक सदस्य देशों का समर्थन प्राप्त हुआ। यह सुरक्षा परिषद द्वारा शांति सैनिकों की सुरक्षा के लिए पहले किए गए प्रयासों की निरंतरता का हिस्सा है। वर्ष 2020 में पारित United Nations Security Council Resolution 2518 शांति सैनिकों की सुरक्षा और संरक्षा पर केंद्रित था। इसके बाद 2021 में भारत द्वारा तैयार United Nations Security Council Resolution 2589 को अपनाया गया, जिसमें शांति सैनिकों की सुरक्षा और अपराधियों की जवाबदेही पर विशेष जोर दिया गया था।

शांति सैनिकों के सामने बढ़ती चुनौतियां

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 1948 में शांति स्थापना अभियानों की शुरुआत के बाद से लगभग 4,500 शांति सैनिक अपने कर्तव्य निर्वहन के दौरान जान गंवा चुके हैं। केवल वर्ष 2025 में ही 59 शांति सैनिकों की मृत्यु दर्ज की गई। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि विश्व के विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों में शांति सैनिकों को लगातार गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • संयुक्त राष्ट्र (UN) की स्थापना वर्ष 1945 में हुई थी।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संगठन के छह प्रमुख अंगों में से एक है।
  • संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन की शुरुआत वर्ष 1948 में मध्य पूर्व में सैन्य पर्यवेक्षकों की तैनाती से हुई थी।
  • वर्ष 1948 से अब तक लगभग 4,500 शांति सैनिक कर्तव्य निभाते हुए शहीद हो चुके हैं।
  • वर्ष 2025 में 59 शांति सैनिकों की मृत्यु दर्ज की गई थी।
  • प्रस्ताव 2823 (2026) को डेनमार्क और पाकिस्तान ने संयुक्त रूप से तैयार किया था।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रस्ताव 2823 को अपनाना वैश्विक शांति अभियानों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे शांति सैनिकों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित होगी और भविष्य में संयुक्त राष्ट्र मिशनों की प्रभावशीलता तथा विश्वसनीयता को और मजबूती मिलेगी।

Originally written on June 24, 2026 and last modified on June 24, 2026.

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