आईसीएआर का 98वां स्थापना दिवस: ‘विकसित कृषि और समृद्ध किसान’ के लिए 2047 तक का रोडमैप जारी
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने 16 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में अपना 98वां स्थापना दिवस मनाते हुए ‘विकसित कृषि और समृद्ध किसान’ के लिए वर्ष 2047 तक का व्यापक रोडमैप जारी किया। यह रोडमैप विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य जलवायु-अनुकूल कृषि, आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा, कृषि अनुसंधान को किसानों तक पहुंचाना तथा भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ, उत्पादक और लाभकारी बनाना है।
आईसीएआर और भारतीय कृषि अनुसंधान
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) भारत में कृषि अनुसंधान और कृषि शिक्षा का सर्वोच्च राष्ट्रीय संगठन है। इसकी स्थापना वर्ष 1929 में हुई थी और यह एशिया के सबसे पुराने कृषि अनुसंधान संस्थानों में से एक है। आईसीएआर, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के अधीन कार्य करता है। यह फसल विज्ञान, पशु विज्ञान, मत्स्य पालन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा कृषि नवाचार से जुड़े अनुसंधान का समन्वय करता है।
वर्ष 2047 के लिए प्रमुख लक्ष्य
आईसीएआर द्वारा जारी रोडमैप में कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इनमें 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज विकसित करना, आईसीएआर की तकनीकों को 10 करोड़ किसानों तक पहुंचाना तथा ‘वन इंस्टीट्यूट-वन ग्रैंड इनोवेशन’ पहल शुरू करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, संगठन ओपन डिजिटल नॉलेज प्लेटफॉर्म विकसित करेगा, नकली बीजों और कीटनाशकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करेगा तथा तकनीकों के व्यावसायीकरण के माध्यम से वर्ष 2029 तक 10,000 करोड़ रुपये के आंतरिक संसाधन सृजित करने का लक्ष्य रखेगा।
नई तकनीकें और कृषि नवाचार
स्थापना दिवस समारोह के दौरान आईसीएआर ने 43 नई फसल किस्में, 17 नई तकनीकों एवं उत्पादों तथा 14 प्रकाशनों का विमोचन किया। इनमें अधिक उत्पादन देने वाली, रोग प्रतिरोधी और पोषक तत्वों से भरपूर फसल किस्में शामिल हैं। साथ ही पशुधन और मत्स्य पालन के लिए नए टीके तथा डिजिटल कृषि समाधान भी प्रस्तुत किए गए। इन नवाचारों का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, कृषि उत्पादन में सुधार करना और बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप खेती को अधिक सक्षम बनाना है।
डिजिटल कृषि और किसान सशक्तिकरण
आईसीएआर का प्रस्तावित ओपन डिजिटल नॉलेज प्लेटफॉर्म किसानों, शोधकर्ताओं और कृषि विशेषज्ञों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को आसान बनाएगा। इसके माध्यम से कृषि अनुसंधान, आधुनिक तकनीकों, मौसम आधारित सलाह और नवाचारों तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा विकसित कृषि संकल्प अभियान, जो अगस्त 2025 में संपन्न हुआ था, के दौरान देशभर में 60,000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और 1.35 करोड़ से अधिक किसानों से सीधा संवाद स्थापित किया गया। यह अभियान विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की स्थापना 1929 में हुई थी और यह एशिया के सबसे पुराने कृषि अनुसंधान संगठनों में से एक है।
- जलवायु-स्मार्ट कृषि (Climate-Smart Agriculture) ऐसी कृषि पद्धति है, जो उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन और उसके प्रभाव को कम करने पर जोर देती है।
- प्रिसीजन एग्रीकल्चर में सेंसर, ड्रोन, डेटा विश्लेषण और डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर खेत स्तर पर वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाता है।
- आधुनिक कृषि में रोबोटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग कृषि मशीनीकरण, फसल निगरानी और किसानों को सलाह देने के लिए तेजी से बढ़ रहा है।
आईसीएआर का 2047 रोडमैप भारतीय कृषि को तकनीक-आधारित, जलवायु-अनुकूल और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अनुसंधान, नवाचार, डिजिटल कृषि और किसानों तक आधुनिक तकनीकों की पहुंच बढ़ाकर यह योजना न केवल कृषि उत्पादन में वृद्धि करेगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और भारत को विकसित कृषि अर्थव्यवस्था बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।