प्रोजेक्ट इनरोड से पूर्वोत्तर भारत में प्राकृतिक रबर उत्पादन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

प्रोजेक्ट इनरोड से पूर्वोत्तर भारत में प्राकृतिक रबर उत्पादन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

भारत में प्राकृतिक रबर उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रोजेक्ट इनरोड (इंडियन नेचुरल रबर ऑपरेशंस फॉर असिस्टेड डेवलपमेंट) ने उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। 15–16 जुलाई 2026 तक इस परियोजना के तहत 2 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 1.8 लाख हेक्टेयर में नए रबर बागानों का विकास किया जा चुका है। यह अभियान पूर्वोत्तर भारत और पश्चिम बंगाल के 113 जिलों में संचालित किया जा रहा है और इसे देश में कम समय में प्राकृतिक रबर बागानों के सबसे तेज विस्तार वाली परियोजनाओं में माना जा रहा है।

प्रोजेक्ट इनरोड की प्रमुख विशेषताएं

प्रोजेक्ट इनरोड की शुरुआत वित्त वर्ष 2021-22 में लगभग 1,100 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ की गई थी। इस परियोजना का कार्यान्वयन रबर बोर्ड भारत द्वारा किया जा रहा है, जबकि इसके लिए वित्तीय सहयोग ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के माध्यम से अपोलो टायर्स, सीएट, जेके टायर और एमआरएफ जैसी प्रमुख कंपनियां प्रदान कर रही हैं। परियोजना के अंतर्गत नए रबर बागानों का विकास, उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री की आपूर्ति तथा किसानों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक 2 लाख से अधिक लाभार्थियों, जिनमें अधिकांश छोटे किसान हैं, को 8.3 करोड़ से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले पौधे वितरित किए जा चुके हैं।

पूर्वोत्तर भारत में रबर खेती का विस्तार

प्राकृतिक रबर हेविया ब्रासिलिएन्सिस नामक उष्णकटिबंधीय वृक्ष के लेटेक्स से प्राप्त किया जाता है। पर्याप्त वर्षा, अधिक आर्द्रता और अनुकूल तापमान के कारण पूर्वोत्तर भारत रबर उत्पादन के लिए तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र बन गया है। परियोजना के तहत 200 से अधिक नर्सरियां विकसित की गई हैं, जहां उन्नत रबर क्लोन तैयार किए जा रहे हैं। इन नर्सरियों से नए बागानों के लिए गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध कराई जाती है और कम उत्पादन देने वाले पुराने पौधों को बेहतर किस्मों से प्रतिस्थापित किया जा रहा है।

लक्ष्य और अगला चरण

कोविड-19 महामारी जैसी चुनौतियों के बावजूद परियोजना अपने कुल लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत पूरा कर चुकी है। अगले चरण में 145 करोड़ रुपये की लागत से इनरोड स्किलिंग एंड प्रोडक्शन एफिशिएंसी एन्हांसमेंट ड्राइव (आईस्पीड) शुरू की जाएगी। इस चरण के अंतर्गत आधुनिक स्मोकहाउस, कटाई के बाद की प्रसंस्करण सुविधाएं तथा किसानों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य लेटेक्स की गुणवत्ता में सुधार करना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।

उत्पादन और आयात निर्भरता में कमी

परियोजना पूरी होने के बाद पूर्वोत्तर भारत की देश के कुल प्राकृतिक रबर उत्पादन में हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से बढ़कर 40–45 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। विस्तारित बागानों से लगभग 3 लाख टन प्राकृतिक रबर का वार्षिक उत्पादन होने की संभावना है। भारत प्राकृतिक रबर का बड़ा उपभोक्ता है, विशेष रूप से टायर उद्योग के लिए। वर्तमान में देश अपनी आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ने से आयात निर्भरता कम होगी और टायर तथा अन्य रबर आधारित उद्योगों को स्थिर कच्चा माल उपलब्ध हो सकेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • प्राकृतिक रबर का प्रमुख स्रोत हेविया ब्रासिलिएन्सिस वृक्ष का लेटेक्स होता है।
  • रबर बोर्ड भारत वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक संस्था है।
  • प्राकृतिक रबर का सबसे अधिक उपयोग टायर निर्माण उद्योग में किया जाता है।
  • पूर्वोत्तर भारत में अनुकूल जलवायु के कारण रबर उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है।

प्रोजेक्ट इनरोड भारत में प्राकृतिक रबर उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में सुधार करने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आधुनिक पौध सामग्री, तकनीकी प्रशिक्षण और बेहतर प्रसंस्करण सुविधाओं के माध्यम से यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत को देश के प्रमुख रबर उत्पादक क्षेत्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

Originally written on July 16, 2026 and last modified on July 16, 2026.

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