आईसीएआर की जीनोम एडिटिंग पहल से कृषि क्षेत्र को नई दिशा
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) देश में फसल सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है। परिषद लगभग 40 फसल किस्मों की जीनोम एडिटिंग पर काम कर रही है, जिसके लिए 34 शोध संस्थानों को जोड़ा गया है। इस पहल में खेत की फसलें और बागवानी फसलें दोनों शामिल हैं। इनमें दलहन, गेहूं, केला, टमाटर, कपास, सोयाबीन और धान जैसी महत्वपूर्ण फसलें शामिल हैं।यह प्रयास ऐसे समय में किया जा रहा है जब भारत को बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी और कृषि उत्पादकता की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आईसीएआर का लक्ष्य ऐसी किस्में विकसित करना है जो अधिक उपज दें, कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन करें और पर्यावरण पर कम दबाव डालें।
जीनोम एडिटिंग क्या है
जीनोम एडिटिंग एक आधुनिक तकनीक है, जिसके जरिए पौधे के अपने डीएनए में सटीक और लक्षित बदलाव किए जाते हैं। इसमें बाहरी जीन को पौधे के जीनोम में नहीं जोड़ा जाता। एसडीएन-1 और एसडीएन-2 श्रेणियों के तहत किए जाने वाले ये बदलाव पारंपरिक जेनेटिक मॉडिफिकेशन से अलग माने जाते हैं।जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने वर्ष 2022 में एसडीएन-1 और एसडीएन-2 श्रेणी के जीनोम-एडिटेड पौधों की नियामकीय समीक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं जारी की थीं। इस ढांचे के तहत ट्रांसजीन-फ्री यानी बाहरी जीन रहित संपादित फसलों को छूट दी गई है।
धान की दो नई जीनोम-एडिटेड किस्में
आईसीएआर ने पहले ही धान की दो जीनोम-एडिटेड किस्में जारी की हैं। इनमें डीआरआर धान 100, जिसे कमला भी कहा जाता है, और पूसा डीएसटी राइस 1 शामिल हैं। इन किस्मों को अधिक उपज, सूखा सहनशीलता, कम सिंचाई आवश्यकता और कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए विकसित किया गया है।रिपोर्टों के अनुसार, इन किस्मों से उपज में 25 प्रतिशत तक वृद्धि और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 20 प्रतिशत कमी की संभावना है। चूंकि धान भारत की प्रमुख खाद्य फसल है, इसलिए जलवायु-लचीली किस्मों का विकास खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एआई आधारित नई तकनीक भी विकसित
आईसीएआर-केन्द्रीय धान अनुसंधान संस्थान, कटक के वैज्ञानिकों ने प्लांट ओपनक्रिस्पर-1 या POC1 नामक एक एआई-डिज़ाइन जीनोम-एडिटिंग प्लेटफॉर्म भी विकसित और सत्यापित किया है। यह एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरण है, जिसे पौधों की कोशिकाओं में परीक्षण किया गया है।यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय कृषि अनुसंधान अब केवल पारंपरिक सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्नत जैव प्रौद्योगिकी और एआई का उपयोग करके भविष्य की फसलों को तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आईसीएआर का पूरा नाम Indian Council of Agricultural Research है।
- एसडीएन-1 और एसडीएन-2 जीनोम एडिटिंग की वे श्रेणियां हैं जिनमें पौधे के अपने डीएनए में लक्षित बदलाव किए जाते हैं।
- डीआरआर धान 100 और पूसा डीएसटी राइस 1 आईसीएआर की जारी की गई भारत की पहली जीनोम-एडिटेड धान किस्में हैं।
- प्लांट ओपनक्रिस्पर-1 आईसीएआर-केन्द्रीय धान अनुसंधान संस्थान, कटक द्वारा विकसित एआई-डिज़ाइन जीनोम-एडिटिंग प्लेटफॉर्म है।
आईसीएआर की यह पहल 2047 तक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने, बेहतर उपज देने वाली किस्में विकसित करने और मिट्टी की सेहत सुधारने के लक्ष्य से जुड़ी है। यदि यह कार्यक्रम सफल रहता है, तो भारतीय कृषि को जलवायु परिवर्तन के दौर में अधिक टिकाऊ और उत्पादक बनाने में बड़ी मदद मिल सकती है।