भारत की सौर निर्माण क्षमता को नई ऊंचाई मिली

भारत की सौर निर्माण क्षमता को नई ऊंचाई मिली

प्रधानमंत्री ऊर्जा क्षेत्र की घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रीमियर एनर्जीज ने आंध्र प्रदेश के नायडुपेटा में 7 GW क्षमता वाली एन-टाइप TOPCon G12R सौर सेल निर्माण इकाई शुरू की है। इस संयंत्र के साथ कंपनी की कुल सौर सेल निर्माण क्षमता 10.6 GW हो गई है, जो देश में सबसे अधिक बताई जा रही है। यह विस्तार भारत में सौर उपकरणों के स्थानीय उत्पादन, आपूर्ति श्रृंखला मजबूती और उच्च दक्षता वाली तकनीक के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नायडुपेटा संयंत्र से क्या बदलेगा

यह इकाई 101 एकड़ क्षेत्र में फैली है और इसके निर्माण पर लगभग 3,293 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय हुआ है। संयंत्र को इस तरह तैयार किया गया है कि स्थिरीकरण के बाद यह औसतन 25.8% दक्षता वाले सौर सेल बना सके। कंपनी के अनुसार इसकी उत्पादन क्षमता लगभग 88,000 सौर सेल प्रति घंटे की है। फिलहाल यहां ट्रायल रन शुरू हो चुके हैं और व्यावसायिक उत्पादन स्थिरता तथा रैम्प-अप के बाद शुरू होगा।

सौर सेल सूर्य के प्रकाश को फोटोवोल्टिक प्रभाव के जरिए बिजली में बदलते हैं। एन-टाइप TOPCon तकनीक उच्च दक्षता वाले मॉड्यूल में इस्तेमाल होती है, जबकि G12R बड़े आकार के वेफर और सेल फॉर्मेट को दर्शाता है, जो आधुनिक फोटोवोल्टिक निर्माण में उपयोगी माना जाता है।

तकनीक, डिजिटल सिस्टम और जल प्रबंधन

इस संयंत्र की खासियत केवल क्षमता नहीं, बल्कि इसकी तकनीकी संरचना भी है। इसमें डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जल पुनर्चक्रण के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली का उपयोग किया गया है। जीरो लिक्विड डिस्चार्ज व्यवस्था में अपशिष्ट जल को उपचारित कर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, जिससे तरल अपशिष्ट लगभग शून्य रह जाता है।

भारत जैसे देश में, जहां ऊर्जा मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसी इकाइयां घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर आयात निर्भरता कम करने में मदद कर सकती हैं। साथ ही, उच्च दक्षता वाली तकनीकें प्रति यूनिट क्षेत्र में अधिक बिजली उत्पादन संभव बनाती हैं, जो बड़े पैमाने की सौर परियोजनाओं के लिए उपयोगी है।

कंपनी की आगे की योजना और बाजार स्थिति

प्रीमियर एनर्जीज ने अगले तीन वर्षों में 12,500 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना भी बताई है। इस योजना में इंगॉट और वेफर उत्पादन में बैकवर्ड इंटीग्रेशन के साथ-साथ इनवर्टर, ट्रांसफॉर्मर और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम जैसे क्षेत्रों में विविधीकरण शामिल है।

जून 2026 तक कंपनी के पास 150 अरब रुपये का ऑर्डर बुक था। इसमें 58% हिस्सा सेल्स का और 40% हिस्सा मॉड्यूल्स का था। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी की पकड़ केवल निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि बाजार मांग और आपूर्ति दोनों स्तरों पर मजबूत हो रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • फोटोवोल्टिक सेल अर्धचालक उपकरण होते हैं, जो सौर विकिरण को प्रत्यक्ष धारा बिजली में बदलते हैं।
  • TOPCon का पूरा नाम टनल ऑक्साइड पैसिवेटेड कॉन्टैक्ट है, जो उच्च दक्षता वाली सौर सेल तकनीक है।
  • जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली में अपशिष्ट जल को उपचारित कर पुनः उपयोग किया जाता है।
  • सौर विनिर्माण में बैकवर्ड इंटीग्रेशन आमतौर पर इंगॉट, वेफर, सेल और मॉड्यूल तक फैला होता है।

यह परियोजना भारत के सौर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक अहम संकेत है कि देश अब केवल सौर ऊर्जा का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उच्च तकनीक वाले सौर उपकरणों का बड़ा उत्पादक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Originally written on September 21, 2026 and last modified on September 21, 2026.

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