दवाओं के सुरक्षित उपयोग के लिए जारी हुआ राष्ट्रीय फार्मूलरी का नया संस्करण
भारत में दवाओं के मानकीकृत और तर्कसंगत उपयोग को मजबूत करने के लिए 7वीं राष्ट्रीय फार्मूलरी ऑफ इंडिया (NFI) 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में जारी की गई। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने इसे 6वें राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह अभियान के दौरान जारी किया। यह प्रकाशन स्वास्थ्यकर्मियों, शिक्षकों और फार्मेसी व चिकित्सा के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री माना जाता है।
राष्ट्रीय फार्मूलरी क्यों महत्वपूर्ण है
राष्ट्रीय फार्मूलरी ऑफ इंडिया में दवाओं से जुड़ी मानक जानकारी दी जाती है, जिससे चिकित्सकीय अभ्यास में सही दवा चयन और सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा मिलता है। यह केवल एक संदर्भ पुस्तक नहीं, बल्कि दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को प्रोत्साहित करने वाला उपकरण भी है। चिकित्सा और फार्मेसी शिक्षा में इसका उपयोग छात्रों को दवाओं की खुराक, उपयोग, सावधानियों और सामान्य जानकारी को व्यवस्थित रूप से समझने में मदद करता है।
भारत जैसे बड़े और विविध स्वास्थ्य तंत्र में एक समान मानक संदर्भ का होना बेहद उपयोगी है, क्योंकि इससे दवा-आधारित निर्णयों में एकरूपता आती है और अनावश्यक या गलत उपयोग की संभावना कम होती है।
भारतीय फार्माकोपिया आयोग की भूमिका
राष्ट्रीय फार्मूलरी ऑफ इंडिया का प्रकाशन भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) करता है, जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक संस्था है। आयोग 2008 से इस श्रृंखला के नियमित अद्यतन जारी कर रहा है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि दवाओं से जुड़ी जानकारी समय के साथ बदलते चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप बनी रहे।
आयोग ने 1 सितंबर 2026 को फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया से भी आग्रह किया था कि PharmD कॉलेजों को लॉन्च और वैज्ञानिक सत्रों में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए जाएं। इससे शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
फार्माकोविजिलेंस सप्ताह और दवा सुरक्षा का संदेश
यह प्रकाशन 17 से 23 सितंबर 2026 तक आयोजित 6वें राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह अभियान के दौरान जारी किया गया। इस वर्ष की थीम थी: “Promoting Rational Use of Medicines through Pharmacovigilance: A Step Towards Safer Healthcare”. अभियान का समन्वय गाजियाबाद स्थित IPC के राष्ट्रीय समन्वय केंद्र-फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम द्वारा किया गया।
फार्माकोविजिलेंस का उद्देश्य दवाओं के दुष्प्रभावों और उनसे जुड़ी सुरक्षा चिंताओं की निगरानी करना है। ऐसे अभियान और संदर्भ प्रकाशन मिलकर स्वास्थ्य प्रणाली में दवा सुरक्षा, जागरूकता और बेहतर उपचार प्रथाओं को मजबूत करते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय फार्मूलरी ऑफ इंडिया का उपयोग दवाओं के तर्कसंगत और सुरक्षित उपयोग के संदर्भ के रूप में किया जाता है।
- भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक संस्था है।
- IPC ने 2008 से राष्ट्रीय फार्मूलरी ऑफ इंडिया के नियमित अद्यतन जारी किए हैं।
- पिछला 6वां संस्करण अक्टूबर 2021 में जारी किया गया था।
नया संस्करण दवा-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और फार्मेसी प्रशिक्षण के लिए एक उपयोगी संदर्भ के रूप में काम करेगा। इससे दवा सुरक्षा और मानकीकृत उपचार पद्धतियों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।