जयपुर में WWF सम्मेलन से संरक्षण एजेंडा को नई वैश्विक गति
जयपुर, राजस्थान में 21 सितंबर 2026 को WWF ग्लोबल कंजर्वेशन कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन हुआ। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया, जिसमें 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। यह आयोजन जैव विविधता संरक्षण, जलवायु कार्रवाई और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग जैसे मुद्दों पर वैश्विक सहयोग को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
WWF सम्मेलन का वैश्विक महत्व
वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर यानी WWF एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 1961 में हुई थी। यह संस्था वन्यजीव संरक्षण, आवास सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से निपटने और प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग पर काम करती है। ऐसे में जयपुर में आयोजित यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि संरक्षण नीतियों, अनुभवों और प्राथमिकताओं को साझा करने का बड़ा मंच है।
भारत जैसे देश के लिए यह आयोजन इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां संरक्षण के साथ विकास का संतुलन बनाए रखने की चुनौती लगातार बनी रहती है। सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी से यह संकेत मिलता है कि पर्यावरणीय संकट अब किसी एक देश की समस्या नहीं, बल्कि साझा वैश्विक चिंता बन चुका है।
भारत की संरक्षण उपलब्धियां और नीतिगत ढांचा
पिछले एक दशक में भारत ने संरक्षित क्षेत्रों के विस्तार में उल्लेखनीय प्रगति की है। देश में संरक्षित क्षेत्रों की संख्या लगभग 750 से बढ़कर 1,000 से अधिक हो गई है। इसी अवधि में टाइगर रिजर्व 47 से बढ़कर 58 और हाथी रिजर्व 30 से बढ़कर 33 हो गए हैं। यह विस्तार वन्यजीव संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत में कानूनी और संवैधानिक स्तर पर भी पर्यावरण संरक्षण के लिए मजबूत ढांचा मौजूद है। इसमें वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 शामिल हैं। संविधान का अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण, वन और वन्यजीवों की रक्षा तथा सुधार का निर्देश देता है, जबकि अनुच्छेद 51A(g) नागरिकों को वनों, झीलों, नदियों और वन्यजीवों की रक्षा का मौलिक कर्तव्य सौंपता है।
रामसर साइट्स और प्रजाति पुनर्स्थापन की दिशा
जल संरक्षण के क्षेत्र में भी भारत ने महत्वपूर्ण बढ़त हासिल की है। देश में रामसर साइट्स की संख्या 24 से बढ़कर 101 हो गई है। रामसर साइट्स वे आर्द्रभूमियां होती हैं जिन्हें 1971 के रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व का दर्जा दिया जाता है। इनका संरक्षण प्रवासी पक्षियों, जल-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय जैव विविधता के लिए बेहद जरूरी है।
इसी तरह भारत का चीता पुनरुत्पादन कार्यक्रम भी संरक्षण की नई दिशा दिखाता है। यह कार्यक्रम 20वीं सदी में देश से विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति को भारतीय संरक्षित परिदृश्यों में फिर से स्थापित करने की पहल से जुड़ा है। ऐसे प्रयास यह दर्शाते हैं कि संरक्षण अब केवल प्रजातियों को बचाने तक सीमित नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने की व्यापक रणनीति बन चुका है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- WWF ग्लोबल कंजर्वेशन कॉन्फ्रेंस का आयोजन 21 सितंबर 2026 को जयपुर, राजस्थान में हुआ।
- WWF की स्थापना 1961 में हुई थी और यह एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है।
- भारत में टाइगर रिजर्व 47 से बढ़कर 58 और हाथी रिजर्व 30 से बढ़कर 33 हो गए हैं।
- रामसर साइट्स अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियां होती हैं, जिन्हें 1971 के रामसर कन्वेंशन के तहत मान्यता मिलती है।
जयपुर में हुआ यह सम्मेलन भारत की संरक्षण उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर रखने का अवसर भी बना और यह संदेश भी दिया कि पर्यावरण संरक्षण अब साझा जिम्मेदारी और दीर्घकालिक नीति-निर्माण का विषय है।