अंतरिक्ष रॉकेटों के लिए स्वदेशी चिप्स से भारत की नई छलांग

अंतरिक्ष रॉकेटों के लिए स्वदेशी चिप्स से भारत की नई छलांग

भारत अब अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों में देश में बने सेमीकंडक्टर और चिप्स का इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की 27 जुलाई 2026 की घोषणा के बाद यह साफ हुआ कि स्पेस रॉकेटों के लिए जरूरी इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर में आत्मनिर्भरता को तेज किया जा रहा है। यह कदम ऐसे समय आया है जब स्कायरूट एयरोस्पेस के साथ हुई बैठक के बाद विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 के ऑर्बिट तक पहुंचने की उपलब्धि भी सामने आई, जिससे भारत को पहला निजी रूप से विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट मिला।

अंतरिक्ष मिशनों में चिप्स की भूमिका

रॉकेट और उपग्रह केवल ईंधन और संरचना से नहीं चलते, बल्कि उनके भीतर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम मिशन की सफलता तय करते हैं। सेमीकंडक्टर चिप्स गाइडेंस सिस्टम, टेलीमेट्री यूनिट, ऑनबोर्ड कंप्यूटर और कंट्रोल प्रोसेसर जैसे हिस्सों में काम आते हैं। अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों के लिए बनने वाली चिप्स को तेज कंपन, विकिरण, तापमान में बदलाव और निर्वात जैसी कठिन परिस्थितियों में भी भरोसेमंद रहना पड़ता है। इसी वजह से स्पेस-ग्रेड इलेक्ट्रॉनिक्स का विकास सामान्य इलेक्ट्रॉनिक्स से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

स्वदेशी स्पेस चिप्स की दिशा में भारत की तैयारी

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरिक्ष इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में लगातार क्षमता विकसित की है। मार्च 2026 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने चार वर्षों के भीतर अपने सेमीकंडक्टर खुद बनाने की योजना की घोषणा की थी। इस दिशा में प्रोसेसर, कंट्रोलर और मिशन-विशिष्ट हार्डवेयर पर काम किया जा रहा है, ताकि लॉन्च व्हीकल और अंतरिक्ष यानों के लिए जरूरी तकनीक देश में ही उपलब्ध हो सके। इससे आयात पर निर्भरता घटेगी और रणनीतिक तकनीक पर नियंत्रण भी मजबूत होगा।

VIKRAM3201 और अन्य स्वदेशी प्रोसेसर

सेमीकॉन इंडिया 2025 में भारत का पहला पूरी तरह स्वदेशी 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर VIKRAM3201 प्रस्तुत किया गया था। इसे सेमी-कंडक्टर लैबोरेटरी और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर ने विकसित किया और PSLV-C60 मिशन के PSLV ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल-4 पर अंतरिक्ष में इसका सत्यापन भी किया गया। यह प्रोसेसर अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों की कठोर परिस्थितियों के लिए बनाया गया है। यह 16-बिट Vikram1601 का उन्नत संस्करण है, जिसका उपयोग 2009 से ISRO के लॉन्च वाहनों में हो रहा है।इसी तरह फरवरी 2025 में IIT मद्रास और ISRO ने Indigenous RISCV Controller for Space Applications यानी IRIS विकसित किया था। यह कमांड और कंट्रोल सिस्टम सहित कई महत्वपूर्ण अंतरिक्ष कार्यों के लिए उपयोगी है। इसके अलावा KALPANA3201 नाम का एक और 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर भी लॉन्च व्हीकल अनुप्रयोगों के लिए तैयार किया गया, जिसे ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर टूलसेट के साथ काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • VIKRAM3201 भारत का पहला पूरी तरह स्वदेशी 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर है, जिसे अंतरिक्ष उपयोग के लिए विकसित किया गया।
  • Vikram1601 एक 16-बिट प्रोसेसर है, जिसका उपयोग ISRO के लॉन्च वाहनों में 2009 से हो रहा है।
  • IRIS का पूरा नाम Indigenous RISCV Controller for Space Applications है।
  • PSLV-C60 मिशन के PSLV Orbital Experimental Module-4 पर VIKRAM3201 का अंतरिक्ष में सत्यापन किया गया था।

भारत की यह पहल केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि अंतरिक्ष क्षेत्र में दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। निजी कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से देश अब स्पेस हार्डवेयर के एक मजबूत घरेलू इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है।

Originally written on July 28, 2026 and last modified on July 28, 2026.

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