RELIEF योजना की समयसीमा बढ़ी, निर्यातकों को जोखिम कवर में राहत
भारत सरकार के वाणिज्य विभाग ने निर्यातकों को राहत देने वाली RELIEF योजना के तहत Component II की समयसीमा बढ़ा दी है। यह विस्तार 2 अक्टूबर 2026 को लागू किया गया और अब पात्र शिपमेंट 31 मार्च 2027 तक इस दायरे में रहेंगे। यह कदम ऐसे समय में आया है जब समुद्री मार्गों में व्यवधान, मालभाड़े में तेज बढ़ोतरी और बीमा लागत में दबाव जैसे कारण निर्यात कारोबार को प्रभावित कर रहे हैं।
RELIEF योजना क्यों महत्वपूर्ण है
RELIEF का पूरा नाम Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation है। इसे 19 मार्च 2026 को भारतीय निर्यातकों के लिए शुरू किया गया था, खासकर उन परिस्थितियों में जब खाड़ी क्षेत्र और व्यापक पश्चिम एशिया समुद्री गलियारे में अस्थिरता के कारण व्यापारिक जोखिम बढ़ गए थे। इस योजना का उद्देश्य निर्यातकों को असाधारण मालभाड़ा वृद्धि, ऊंची बीमा प्रीमियम दरों और युद्ध-संबंधी जोखिमों से कुछ सुरक्षा देना है।
सरकार ने 30 सितंबर 2026 की अधिसूचना संख्या 37/2026-27 के जरिए इस विस्तार को अधिसूचित किया। इससे उन निर्यातकों को राहत मिलेगी जो निर्दिष्ट क्षेत्रों के लिए आगामी शिपमेंट भेजते हैं और Export Credit Guarantee Corporation से कवर लेते हैं।
Component II में क्या सुविधा मिलती है
RELIEF के Component II के तहत निर्यातकों को 95% जोखिम कवरेज मिलता है। इसका लाभ उन्हीं शिपमेंट्स पर लागू होता है जो तयशुदा क्षेत्रों के लिए भेजे जा रहे हों और जिन पर ECGC का बीमा कवर लिया गया हो। विस्तारित अवधि में पात्र शिपमेंट्स के लिए निर्यातकों द्वारा चुकाया गया बीमा प्रीमियम पूर्व-विघटन स्तरों पर सीमित रहेगा।
यह प्रावधान खास तौर पर उन निर्यातकों के लिए उपयोगी है जिन्हें अचानक बढ़े हुए लॉजिस्टिक्स खर्च और अनिश्चित समुद्री परिस्थितियों के बीच अपने ऑर्डर पूरे करने पड़ते हैं। इससे निर्यात अनुबंधों की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलती है।
कौन-सा माल शामिल है और क्या बाहर है
विस्तारित Component II के तहत पात्र कार्गो में Full Container Load, Less than Container Load और refrigerated containers शामिल हैं। हालांकि ऊर्जा से जुड़े शिपमेंट इस कवरेज से बाहर रखे गए हैं। यह योजना उन शिपमेंट्स पर लागू होती है जो डिलीवरी या ट्रांसशिपमेंट के लिए भेजे जा रहे हों।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ECGC भारत की निर्यात ऋण बीमा संस्था है, जो निर्यातकों को भुगतान जोखिम से सुरक्षा देती है।
- RoDTEP का पूरा नाम Remission of Duties and Taxes on Exported Products है।
- 17 अप्रैल 2026 को मिस्र और जॉर्डन को RELIEF ढांचे के तहत पात्र गंतव्यों में जोड़ा गया था।
- पश्चिम एशिया भारतीय व्यापार और समुद्री संपर्क के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।
निर्यात नीति के व्यापक संदर्भ में कदम
RELIEF योजना के साथ-साथ सरकार ने RoDTEP योजना को भी 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाया है। RoDTEP निर्यातित उत्पादों पर निहित शुल्कों और करों की भरपाई करने वाला एक निर्यात प्रोत्साहन ढांचा है। इन दोनों कदमों से संकेत मिलता है कि सरकार वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अनिश्चितताओं के बीच भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने पर ध्यान दे रही है।
समुद्री मार्गों की अस्थिरता और बढ़ती लागत के दौर में ऐसी योजनाएं निर्यातकों के लिए वित्तीय सुरक्षा कवच की तरह काम करती हैं। इससे भारतीय निर्यात को झटकों से बचाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाए रखने में मदद मिल सकती है।