बिहार में भवन नक्शा मंजूरी आसान करने की नई रूपरेखा
बिहार सरकार ने भवन नक्शा मंजूरी की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए बिहार बिल्डिंग बाय-लॉज 2026 का मसौदा तैयार किया है। इसे 30 सितंबर 2026 को पटना मेट्रोपॉलिटन एरिया अथॉरिटी की वेबसाइट पर सार्वजनिक समीक्षा और आपत्तियों के लिए अपलोड किया गया। यह मसौदा अभी अधिसूचित नहीं हुआ है, इसलिए फिलहाल यह लागू नियम नहीं है।
क्या है इस मसौदे की खासियत
बिल्डिंग बाय-लॉज वे स्थानीय नियम होते हैं, जो भवन निर्माण, नक्शा स्वीकृति, भूमि उपयोग और सुरक्षा मानकों को नियंत्रित करते हैं। बिहार के इस नए मसौदे का उद्देश्य निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं में देरी कम करना और नागरिकों के लिए अनुमोदन प्रणाली को अधिक सुविधाजनक बनाना है। सितंबर 2026 में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता वाले उच्चस्तरीय मंत्रिसमूह ने इस मसौदे की समीक्षा भी की थी।
मसौदे में ऑनलाइन प्रक्रिया, सिंगल-विंडो सिस्टम और जोखिम के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में भवनों को रखने का प्रस्ताव है। इससे कम जोखिम वाले भवनों के लिए प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल और तेज हो सकती है, जबकि अधिक जटिल भवनों के लिए जांच का स्तर अलग रहेगा।
स्व-प्रमाणन और थर्ड-पार्टी जांच का प्रस्ताव
मसौदे के अनुसार कम जोखिम वाले भवनों के लिए स्व-प्रमाणन की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसमें आवेदक यह घोषित करता है कि उसका निर्माण तय मानकों के अनुरूप है। मध्यम जोखिम वाले भवनों के लिए थर्ड-पार्टी निरीक्षण का प्रस्ताव है, जिसमें किसी बाहरी एजेंसी या पेशेवर संस्था द्वारा जांच की जाती है।
इसके साथ ही डीम्ड अप्रूवल की व्यवस्था का भी उल्लेख है। प्रस्ताव के अनुसार यदि सक्षम प्राधिकारी 30 दिनों के भीतर निर्णय नहीं लेता, तो भवन नक्शा आवेदन को स्वीकृत माना जा सकता है। प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी घटाने के लिए ऐसी व्यवस्था कई जगहों पर अपनाई जाती है।
किन भवनों को किस श्रेणी में रखा गया है
मसौदे में भवनों को ऊंचाई और जोखिम के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। 24 मीटर तक ऊंचे आवासीय भवनों को स्व-प्रमाणन श्रेणी में रखने का प्रस्ताव है। इसी तरह अधिकतम 750 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले एक-मंजिला आवासीय भवन भी इसी ढांचे में शामिल किए गए हैं।
24 मीटर से 50 मीटर ऊंचाई वाले भवनों को मध्यम जोखिम श्रेणी में रखकर थर्ड-पार्टी निरीक्षण का प्रस्ताव है। मसौदे में भवन नक्शों को समझने में आसानी के लिए कलर कोडिंग का भी उल्लेख है। सार्वजनिक आपत्तियों और सुझावों के बाद अंतिम नियमों को आकार दिया जा सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बिल्डिंग बाय-लॉज भवन निर्माण, नक्शा स्वीकृति और सुरक्षा मानकों को नियंत्रित करने वाले स्थानीय नियम होते हैं।
- स्व-प्रमाणन में आवेदक स्वयं नियमों के पालन की घोषणा करता है।
- थर्ड-पार्टी निरीक्षण में बाहरी एजेंसी या विशेषज्ञ द्वारा जांच की जाती है।
- डीम्ड अप्रूवल का अर्थ है तय समय में निर्णय न होने पर आवेदन को स्वीकृत मान लेना।
कुल मिलाकर, बिहार का यह मसौदा भवन अनुमति प्रणाली को डिजिटल, तेज और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब आगे की प्रक्रिया में जनता की आपत्तियों और अंतिम अधिसूचना पर सबकी नजर रहेगी।