अनाक क्राकाटोआ के विस्फोट से समुद्र में उभरे दो नए द्वीप
इंडोनेशिया के अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में सितंबर 2026 की लगातार 25 घंटे चली गतिविधि के बाद समुद्र में दो नए द्वीप उभर आए। इन संरचनाओं की पहली जानकारी 22 सितंबर के आसपास नाविकों और स्वयंसेवकों ने दी, जबकि 23 सितंबर को सेंटिनल उपग्रह चित्रों से इनकी पुष्टि हुई। यह घटना ज्वालामुखीय द्वीपों के निर्माण और उनके बदलते स्वरूप को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अनाक क्राकाटोआ और क्राकाटोआ का भूगोल
अनाक क्राकाटोआ का अर्थ “क्राकाटोआ का पुत्र” होता है। यह जावा और सुमात्रा के बीच स्थित सुंडा जलडमरूमध्य में एक ज्वालामुखीय द्वीप है। इसका निर्माण 1883 के क्राकाटोआ विस्फोट के बाद हुआ था, जिसे दर्ज इतिहास की सबसे विनाशकारी ज्वालामुखीय घटनाओं में गिना जाता है। इसी ज्वालामुखी ने समय-समय पर नए भू-आकृतिक बदलाव पैदा किए हैं।
विस्फोट से कैसे बने नए द्वीप
2026 के विस्फोट ने लावा प्रवाह और पाइरोक्लास्टिक पदार्थ के जमाव से अनाक क्राकाटोआ के भू-क्षेत्र में लगभग 32.8 हेक्टेयर, यानी करीब 0.2 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि की। पाइरोक्लास्टिक पदार्थ में राख, लैपिली, ज्वालामुखीय बम और विस्फोट के दौरान निकले खंडित पत्थर शामिल होते हैं। इंडोनेशिया की भूवैज्ञानिक एजेंसी के अनुसार एक नया द्वीप ज्वालामुखी के उत्तर-पश्चिम में लगभग 760 मीटर और दूसरा दक्षिण-पूर्व में लगभग 495 मीटर की दूरी पर स्थित है। दोनों संरचनाएँ ज्वालामुखी के क्रेटर से गुजरने वाली उत्तर-पश्चिम-दक्षिण-पूर्व धुरी पर हैं।
निगरानी, चेतावनी स्तर और सुरक्षा घेरा
एजेंसी ने 2 जुलाई 2026 को अनाक क्राकाटोआ का अलर्ट स्तर बढ़ाकर स्तर III किया था, लेकिन 21 सितंबर को गतिविधि घटने पर इसे स्तर II कर दिया गया। 24 सितंबर 2026 तक मुख्य क्रेटर के चारों ओर 2 किलोमीटर का निषिद्ध क्षेत्र और नए द्वीपों के चारों ओर 1 किलोमीटर का सुरक्षा घेरा तय किया गया। विस्फोट के कारण जकार्ता के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और कई क्षेत्रीय हवाई अड्डों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा, जिससे हजारों उड़ानें और यात्री प्रभावित हुए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अनाक क्राकाटोआ इंडोनेशिया के सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित है, जो जावा और सुमात्रा को अलग करता है।
- 1883 का क्राकाटोआ विस्फोट वैश्विक ज्वालामुखी विज्ञान में एक प्रमुख संदर्भ घटना माना जाता है।
- सेंटिनल उपग्रह यूरोपीय संघ के कॉपरनिकस पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम का हिस्सा हैं।
- ज्वालामुखीय द्वीप समुद्री कटाव, ज्वार-भाटे और बार-बार होने वाले विस्फोटों से अपना आकार बदल सकते हैं।
यह घटना दिखाती है कि ज्वालामुखीय गतिविधि केवल विनाश नहीं, बल्कि नए भू-आकृतिक निर्माण की प्रक्रिया भी हो सकती है। समुद्री वातावरण में ऐसे द्वीपों का टिके रहना लावा, राख और तरंगों के बीच चलने वाले निरंतर संघर्ष पर निर्भर करता है।