लद्दाख में केसर खेती की शुरुआत, कृषि विविधीकरण की नई पहल
लद्दाख के लेह जिले में 2 अक्टूबर 2026 को पायलट प्रोजेक्ट के तहत केसर की खेती शुरू की गई। स्पितुक फर्खा के कमांड एरिया गेट नंबर 27 पर लगभग 4,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में करीब 90,000 प्रीमियम ईरानी केसर कंद लगाए गए। यह पहल बंजर भूमि के पुनरुद्धार और केंद्र शासित प्रदेश में कृषि विविधीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बंजर जमीन से मूल्यवान फसल तक
यह परियोजना ऐसे क्षेत्र में शुरू की गई है, जो पहले बंजर था और जिसे प्रोजेक्ट हिम सरोवर के तहत पुनर्स्थापित किया गया। इस स्थल पर सिंचाई के लिए इगू-फेह नहर से पानी उपलब्ध कराया गया है। बताया गया है कि लेह में लगभग 800 एकड़ भूमि के पुनरुद्धार से भी यह पहल जुड़ी हुई है।
लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले और सीमित कृषि संसाधनों वाले क्षेत्र में केसर जैसी उच्च-मूल्य फसल का परीक्षण स्थानीय किसानों के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है। इससे पहले यहां लिली और ग्लैडियोलस जैसी उच्च-मूल्य पुष्प खेती के प्रयोग भी किए जा चुके हैं।
केसर खेती क्यों अहम मानी जाती है
केसर Crocus sativus पौधे के सूखे वर्तिकाग्रों से प्राप्त होता है। यह दुनिया के सबसे महंगे मसालों में शामिल है, क्योंकि प्रत्येक फूल से बहुत कम मात्रा में ही केसर के रेशे मिलते हैं। वैश्विक स्तर पर ईरान केसर का सबसे बड़ा उत्पादक है, जबकि भारत में इसकी पारंपरिक पहचान जम्मू-कश्मीर से जुड़ी रही है।
लद्दाख में इसकी खेती का प्रयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र जलवायु और ऊंचाई के लिहाज से विशिष्ट है। यदि यह पायलट सफल रहता है, तो यह सीमित जल संसाधनों वाले हिमालयी क्षेत्रों में वैकल्पिक कृषि मॉडल के रूप में सामने आ सकता है।
संस्थागत सहयोग और आगे की योजना
इस पहल का मार्गदर्शन उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना कर रहे हैं। सीएसआईआर-भारतीय एकीकृत चिकित्सा संस्थान ने 2023 से ही कृषि विभाग के साथ मिलकर लेह और कारगिल में केसर परिचय और तकनीक हस्तांतरण पर काम किया है।
2024 में लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के बीच पालम क्षेत्र में केसर खेती के लिए भूमि आवंटन को लेकर एक समझौता ज्ञापन भी हस्ताक्षरित किया गया था। इससे संकेत मिलता है कि यह पहल केवल एक प्रयोग नहीं, बल्कि दीर्घकालिक कृषि रणनीति का हिस्सा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- केसर Crocus sativus पौधे के सूखे वर्तिकाग्रों से प्राप्त होता है।
- लद्दाख भारत का केंद्र शासित प्रदेश है, जिसका गठन 2019 में हुआ था।
- प्रोजेक्ट हिम सरोवर लद्दाख में भूमि पुनरुद्धार और जल प्रबंधन से जुड़ा है।
- CSIR-IIIM का पूरा नाम CSIR-Indian Institute of Integrative Medicine है।
लद्दाख में केसर खेती की यह शुरुआत कृषि नवाचार, जल प्रबंधन और बंजर भूमि के उपयोग का एक संयुक्त उदाहरण है। यदि पायलट स्तर पर इसके परिणाम सकारात्मक रहते हैं, तो यह क्षेत्र की कृषि संरचना में एक नई दिशा दे सकता है।