बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापन की नई शुरुआत

बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापन की नई शुरुआत

पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में 2 अक्टूबर 2026 को तीन साल की एक रॉयल बंगाल बाघिन को छोड़ा गया। करीब 150 किलोग्राम वजनी इस बाघिन को बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से स्थानांतरित किया गया था। यह कदम राज्य की पहली बाघ पुनर्स्थापन परियोजना की शुरुआत माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य बक्सा में फिर से स्थायी बाघ आबादी विकसित करना है।

बक्सा में बाघों की वापसी की कोशिश

बक्सा टाइगर रिजर्व में लंबे समय से बाघों की मौजूदगी बेहद सीमित रही है। 2018 की बाघ गणना में यहां एक भी बाघ दर्ज नहीं हुआ था, जबकि 2012 के बाद केवल कभी-कभार ही बाघ दिखने की सूचना मिली थी। ऐसे में यह परियोजना केवल एक वन्यजीव स्थानांतरण नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने की कोशिश है।

वन विभाग की योजना अगले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से और बाघों को लाने की है। लक्ष्य यह है कि रिजर्व में ऐसी आबादी तैयार हो, जो प्रजनन कर सके और लंबे समय तक खुद को बनाए रख सके।

कैसे हुई बाघिन की शिफ्टिंग

बाघिन को वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बेहोश कर सुरक्षित तरीके से पकड़ा गया। इसके बाद भारतीय वायुसेना के सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान से उसे हासीमारा एयरबेस तक लाया गया और फिर सड़क मार्ग से बक्सा टाइगर रिजर्व पहुंचाया गया। वहां उसे पहले से तैयार 2.2 हेक्टेयर के सॉफ्ट एनक्लोजर में रखा गया, ताकि वह नए वातावरण के साथ धीरे-धीरे सामंजस्य बिठा सके।

इस बाघिन के गले में जीपीएस-सक्षम रेडियो कॉलर भी लगाया गया है। ऐसे कॉलर वन्यजीव प्रबंधन में बेहद उपयोगी माने जाते हैं, क्योंकि इनके जरिए जानवर की गतिविधि, शिकार व्यवहार, क्षेत्र-निर्धारण और नए आवास में उसके अनुकूलन पर नजर रखी जा सकती है।

परियोजना का पारिस्थितिक महत्व

बक्सा टाइगर रिजर्व पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में स्थित है और पूर्वी हिमालय की तराई क्षेत्रीय भू-आकृति का हिस्सा है। यह डूआर्स क्षेत्र में आता है, जो घने जंगलों, वन्यजीव गलियारों और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है।

ऐसे क्षेत्रों में बाघों की वापसी का महत्व केवल एक प्रजाति तक सीमित नहीं होता। बाघ शीर्ष शिकारी होते हैं और उनकी मौजूदगी शिकार प्रजातियों, वन संरचना और समग्र पारिस्थितिक संतुलन से जुड़ी होती है। इसलिए बक्सा में यह पहल उत्तर बंगाल के व्यापक वन परिदृश्य के लिए भी अहम मानी जा रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • रॉयल बंगाल टाइगर भारत में पाए जाने वाले बाघ की उप-प्रजाति है और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल है।
  • बक्सा टाइगर रिजर्व पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में स्थित है और डूआर्स क्षेत्र का हिस्सा है।
  • वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार में है और उत्तर भारत के तराई परिदृश्य से जुड़ा हुआ है।
  • जीपीएस रेडियो कॉलर का उपयोग स्थानांतरित किए गए बड़े मांसाहारी जीवों की निगरानी के लिए किया जाता है।

बक्सा में बाघिन की यह रिहाई राज्य की वन्यजीव संरक्षण रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले महीनों में इस परियोजना की सफलता काफी हद तक बाघिन के अनुकूलन, निगरानी और आगे होने वाले चरणबद्ध स्थानांतरण पर निर्भर करेगी।

Originally written on October 2, 2026 and last modified on October 2, 2026.

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