दिल्ली में प्रदूषण निगरानी को मिला हाई-टेक सिस्टम

दिल्ली में प्रदूषण निगरानी को मिला हाई-टेक सिस्टम

दिल्ली सरकार ने शास्त्री पार्क में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का उद्घाटन किया। यह केंद्र राजधानी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण की निगरानी, त्वरित कार्रवाई और फील्ड स्तर पर समन्वय को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तैयार किया गया है।

कैसे काम करेगा नया निगरानी केंद्र

इस केंद्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सीसीटीवी निगरानी, जीपीएस ट्रैकिंग और बॉडी कैमरों का उपयोग किया जाएगा। इसके जरिए प्रदूषण से जुड़ी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। 700 से अधिक निर्माण स्थलों की 24 घंटे निगरानी की जाएगी और जैसे ही पीएम10 स्तर बढ़ेगा, सिस्टम अपने आप अलर्ट जारी करेगा।

पीएम10 उन सूक्ष्म कणों को कहा जाता है जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। वायु गुणवत्ता आकलन में यह एक महत्वपूर्ण मानक माना जाता है।

ग्रैप से जुड़ी त्वरित कार्रवाई

यह केंद्र ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी ग्रैप से भी जुड़ा है, जिसे एनसीआर में गंभीर वायु प्रदूषण की स्थिति में लागू किया जाता है। ग्रैप-4 जैसी सख्त श्रेणियों में निर्माण गतिविधियों पर रोक, ट्रकों की आवाजाही पर सीमा और अत्यधिक स्थिति में स्कूल बंद करने जैसे कदम शामिल होते हैं।

निरीक्षण के दौरान वायुदूत टीमों और डीपीसीसी अधिकारियों के लिए बॉडी कैमरे अनिवार्य किए गए हैं। इससे कार्रवाई की पारदर्शिता बढ़ेगी और फील्ड निरीक्षण का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहेगा।

शिकायत से कार्रवाई तक डिजिटल व्यवस्था

केंद्र से 78 उप-मंडलीय टीमों को रीयल-टाइम अलर्ट भेजे जाएंगे, ताकि प्रदूषण हॉटस्पॉट पर तुरंत कार्रवाई हो सके। फील्ड में की गई कार्रवाई की डिजिटल पुष्टि भी की जाएगी, जिससे आगे की निगरानी और रिकॉर्ड-कीपिंग आसान होगी।

इसके साथ ही जनता की भागीदारी के लिए जन सुझाव पोर्टल भी शुरू किया गया है। इस पोर्टल के जरिए लोग प्रदूषण की शिकायत दर्ज कर सकते हैं, सुझाव भेज सकते हैं और पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं की सूचना दे सकते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण की वैधानिक संस्था है।
  • पीएम10 का मापन सामान्यतः माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में किया जाता है।
  • ग्रैप एनसीआर में वायु प्रदूषण की आपात स्थिति से निपटने के लिए लागू किया जाता है।
  • जीपीएस ट्रैकिंग का उपयोग वाहनों, मशीनों और फील्ड ऑपरेशनों की निगरानी में किया जाता है।

इस तरह नया इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण को तकनीक-आधारित, तेज और अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

Originally written on October 2, 2026 and last modified on October 2, 2026.

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