केरल में एआई मौसम स्टेशन से खेती को मिलेगा स्थानीय मौसम का सटीक डेटा
केरल ने जलवायु-स्मार्ट कृषि को मजबूत करने के लिए एएनएनएएम.एआई के स्मार्ट मौसम स्टेशनों को अपने 100-दिवसीय कार्ययोजना के तहत लागू करना शुरू किया है। ये स्टेशन कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से खेत-स्तर पर बेहद स्थानीय मौसम और कृषि डेटा उपलब्ध कराते हैं, ताकि किसान फसल प्रबंधन से जुड़े निर्णय अधिक सटीक तरीके से ले सकें।
खेत के स्तर पर मौसम की सटीक जानकारी
इन स्मार्ट स्टेशनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये लगभग 3 किलोमीटर के दायरे तक मौसम संबंधी जानकारी दे सकते हैं। प्रणाली सौर विकिरण, मिट्टी की नमी, हवा की दिशा-गति, आर्द्रता और वर्षा जैसे संकेतकों पर नजर रखती है। कृषि के लिए यह डेटा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि छोटे-छोटे भौगोलिक क्षेत्रों में मौसम का असर अलग-अलग हो सकता है और सामान्य जिला-स्तरीय पूर्वानुमान हमेशा पर्याप्त नहीं होते।केरल जैसे राज्य में, जहां खेती का बड़ा हिस्सा छोटे जोतों पर आधारित है, वहां स्थानीय मौसम जानकारी और प्रिसिजन फार्मिंग टूल्स की जरूरत और भी बढ़ जाती है। राज्य में लगभग 92 प्रतिशत खेत एक हेक्टेयर से छोटे हैं। ऐसे में एक ही गांव या ब्लॉक के भीतर भी फसल की जरूरतें और मौसम का प्रभाव अलग हो सकता है।
एएनएनएएम.एआई और डिजिटल कृषि ढांचा
एएनएनएएम.एआई, आईआईटी रोपड़ में स्थित कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस है, जो शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से काम करता है। यह परियोजना कृषि के लिए एक डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। इसका मतलब ऐसे साझा डिजिटल सिस्टम से है, जो सार्वजनिक सेवाओं और डेटा-आधारित अनुप्रयोगों को बेहतर तरीके से चलाने में मदद करें।कृषि में एआई और डिजिटल ढांचे का उपयोग केवल मौसम बताने तक सीमित नहीं है। इसका दायरा फसल निगरानी, इनपुट प्रबंधन, संसाधनों के बेहतर उपयोग और जोखिम घटाने तक फैला है। इसी वजह से केरल में इस तकनीक को उपज बढ़ाने, नुकसान कम करने और परिचालन लागत घटाने के उपाय के रूप में देखा जा रहा है।
रोलआउट, प्रशिक्षण और साझेदारी
केरल में यह तैनाती देश के अलग-अलग राज्यों में चरणबद्ध विस्तार का हिस्सा है। इससे पहले पंजाब को 30 मार्च 2026 तक 100 एआई-संचालित मौसम स्टेशनों के पहले कार्यान्वयन स्थल के रूप में चिन्हित किया गया था। इसके साथ ही एएनएनएएम.एआई ने 10,000 छात्रों, ग्रामीण युवाओं और कृषि पेशेवरों को कृषि में एआई अनुप्रयोगों के उपयोग का प्रशिक्षण देने की योजना भी बनाई है।जून 2026 में फ्रांस में आयोजित भारत इनोवेट्स 2026 के दौरान एएनएनएएम.एआई, आईआईटी रोपड़ और सिंगेंटा के बीच साझेदारी की घोषणा की गई थी। इस सहयोग का उद्देश्य फसल स्वास्थ्य निगरानी, कीट प्रकोप की पहचान और हीट-स्ट्रेस प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में तकनीकी समाधान विकसित करना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आईआईटी रोपड़ पंजाब में स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान है।
- कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग फसल निगरानी, मौसम विश्लेषण और इनपुट प्रबंधन में किया जाता है।
- इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित उपकरण खेतों से सेंसर और स्टेशनों के जरिए डेटा जुटाते हैं।
- केरल में छोटे और सीमांत खेतों की बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए स्थानीय मौसम डेटा वहां खेती के लिए खास अहमियत रखता है।
केरल में एआई आधारित मौसम स्टेशन यह दिखाते हैं कि कृषि में तकनीक का उपयोग अब केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे खेतों की जरूरतों से जुड़ रहा है। आने वाले समय में ऐसे सिस्टम किसानों को मौसम जोखिम समझने और बेहतर निर्णय लेने में अधिक सक्षम बना सकते हैं।